लोग कैसे हैं यहाँ के, ये नगर कैसा है ? उनकी जादू भरी बातों में असर कैसा है ? डूबने वाले को बाहर तो निकल…
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“अरमान बहुत हैं “
खुशियाँ कम और अरमान बहुत हैं , जिसे भी देखो परेशान बहुत है ! करीब से देखा तो निकला रेत का घर , मगर दूर…
View More “अरमान बहुत हैं “” कुछ ऐसे भी यह दुनिया जानी जाती है “
पागल से लूटे लूटे जीवन से छुटे छुटे ऊपर से सटे सटे अन्दर से हटे हटे कुछ ऐसे भी यह दुनिया जानी जाती है !…
View More ” कुछ ऐसे भी यह दुनिया जानी जाती है “” फूल भी क्या खिले हैं “
बता फूल भी क्या खिले हैं अकेले , हमें छोड़ के जो चले हैं अकेले ! रहे लोग यों तो सदा पास मेरे , खुदी…
View More ” फूल भी क्या खिले हैं “” चंदा रे ! गुस्सा मत होना “
चंदा रे ! गुस्सा मत होना जालिम था वो घना अंधेरा जिसने मेरा आंगन घेरा बनते — बनते फिर से बिखरा तेरे द्वारे का पगफेरा…
View More ” चंदा रे ! गुस्सा मत होना “” हवा गुज़र गयी पत्ते थे कुछ हिले भी नहीं “
हवा गुज़र गयी पत्ते थे कुछ हिले भी नहीं , वो मेरे शहर में आये भी और मिले भी नही ! ये कैसा रिश्ता हुआ…
View More ” हवा गुज़र गयी पत्ते थे कुछ हिले भी नहीं “” पत्थरों से तो सर बचा आये “
पत्थरों से तो सर बचा आए चोट फूलों की मार से खाए सारी दुनिया को जीतकर लौटे मात परिवार से अपने खाए योग्यता काम तब…
View More ” पत्थरों से तो सर बचा आये “” प्रेम “
द्रव्य नहीं कुछ मेरे पास फिर भी मैं करता हूँ प्यार ! रूप नहीं कुछ मेरे पास , फिर भी मैं करता हूँ प्यार !…
View More ” प्रेम “” बाँसुरी “
बेचैन बाँसुरी बजने को , है दिल में आज उतरने को ! बातें सावन के बूंदों सी , मद्धिम — मद्धिम हैं झरने को !…
View More ” बाँसुरी “” तो मस्त है ज़िंदगी “
खुश रहकर गुज़ारो , तो मस्त है ज़िंदगी , दुःखी रहकर गुज़ारो , तो त्रस्त है ज़िंदगी ! तुलना में गुज़ारो , तो पस्त है…
View More ” तो मस्त है ज़िंदगी “