” कुछ ऐसे भी यह दुनिया जानी जाती है “

पागल से लूटे लूटे जीवन से छुटे छुटे ऊपर से सटे सटे अन्दर से हटे हटे कुछ ऐसे भी यह दुनिया जानी जाती है !…

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” हवा गुज़र गयी पत्ते थे कुछ हिले भी नहीं “

हवा गुज़र गयी पत्ते थे कुछ हिले भी नहीं , वो मेरे शहर में आये भी और मिले भी नही ! ये कैसा रिश्ता हुआ…

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