फिर भी मैं करता हूँ प्यार !
रूप नहीं कुछ मेरे पास ,
फिर भी मैं करता हूँ प्यार !
सांसारिक व्यवहार न ज्ञान ,
फिर भी मैं करता हूँ प्यार !
शक्ति न यौवन पर अभिमान ,
फिर भी मैं करता हूँ प्यार !
कुशल कालाविद् हूँ न प्रवीण ,
फिर भी मैं करता हूँ प्यार !
केवल भावुक दीन मलीन ,
फिर भी मैं करता हूँ प्यार !
सब कुछ साधा, जप, तप , मौन ,
किन्तु न मुझसे छूटा प्रेम !
कितना घूमा देश — विदेश ,
किन्तु न मुझसे छूटा प्रेम !
तरह—तरह के बदले वेष ,
किन्तु न मुझसे छूटा प्रेम !
—— प्रसिद्ध कवि शमशेर बहादुर सिंह
( संकलित )
—— राम कुमार दीक्षित , पत्रकार !

