” पत्थरों से तो सर बचा आये “

पत्थरों से तो सर बचा आए

चोट फूलों की मार से खाए

सारी दुनिया को जीतकर लौटे

मात परिवार से अपने खाए

योग्यता काम तब नहीं आती

जब भी मित्रों से जंग छिड़ जाए

दूसरों को सलाह खूब दिये

अपने मसलों को हल न कर पाए

ऋतु बदलने से यह नहीं होता

सूखे पेडों में फूल, फल आए

जब भी गुजरा अंधेरी गलियों से

छोड़ मुझको गए मेरे साए !!

( संकलित )

—— राम कुमार दीक्षित , पत्रकार !

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