है दिल में आज उतरने को !
बातें सावन के बूंदों सी ,
मद्धिम — मद्धिम हैं झरने को !
यादों में दोस्त, सजी–संवरी ,
सांझे आती हैं मिलने को !
लहरें , बादल , मौसम, पंक्षी,
कितनी ही बातें कहने को !
नज़रें जो कुछ भी बयाँ करें ,
बेताब रहे मन सुनने को !!
( संकलित )
—– राम कुमार दीक्षित , पत्रकार !

