बता फूल भी क्या खिले हैं अकेले ,
हमें छोड़ के जो चले हैं अकेले !
रहे लोग यों तो सदा पास मेरे ,
खुदी से मिले तो हैं अकेले !
दुआ साथ जिनके बड़ी बात गोया ,
नहीं हारते वो भले हैं अकेले !
लिया ठान तो क्या अधूरा रहेगा ,
हँसी होंठ पे ले तुले हैं अकेले !
रहे ख्वाब जो भी सदा साथ मेरे ,
कहूँ दोस्त , कैसे पलें हैं अकेले !
( संकलित )
—– राम कुमार दीक्षित , पत्रकार !
