” ज्योतियां जिससे जले अनेक “

ज्योतियाँ  जिससे  जले अनेक, जलाओ  ऐसा दीपक एक बुझे  जो  तूफानों  में  नहीं  , जले  अविराम  , तिमिर  कर  दूर  ! धरा  पर  लाए  , …

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” फिर बसंत आना है “

तूफानी   लहरें   हों अंबर   के   पहरे   हों पुरवा   के   दामन   पर दाग़   बहुत   गहरे   हों सागर   के   मांझी मत   मन  को   तू   हारना जीवन   के …

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