अलसुबह नींद से जागने से रात को सोने तक कितनी चीजें गुजरती हैं हाथों से होकर पता नहीं क्या — क्या करते हैं हाथ पता …
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” हम कहा बड़ा ध्वाखा होइगा ” हास्य कवि रमई काका की रचना के कुछ अंश “
हम गयन याक दिन लखनौवे, कक्कू संजोग अइस परिगा, पहिलेहे पहिल हम सहरु दीख, सो , कहूँ– कहूँ ध्वाखा होइगा ! जब गयें नुमायिस् द्याखे…
View More ” हम कहा बड़ा ध्वाखा होइगा ” हास्य कवि रमई काका की रचना के कुछ अंश “जल संरक्षण को लेकर बुद्धिजीवियों की गोष्ठी संपन्न
जल संरक्षण को लेकर बुद्धिजीवियों की गोष्ठी संपन्न गिरते जल स्तर पर जताई चिंता । सोनभद्र।जीवन की बेतहाशा बढ़ती भाग दौड़ में व्यक्तिगत मुद्दों की…
View More जल संरक्षण को लेकर बुद्धिजीवियों की गोष्ठी संपन्न” काँटे सहते सहते हम गुलाब हो गये “
हमने डाले बीज प्यार के , उसने काँटे बोये, उन काँटों से लिपट लिपट कर हम रात रात भर रोये दुनिया भर के दर्दों का …
View More ” काँटे सहते सहते हम गुलाब हो गये “” ओ गगन के जगमगाते दीप “
ओ गगन के जगमगाते दीप दीन जीवन के दुलारे, खो गये जो स्वप्न सारे , ला सकोगे क्या उन्हें फिर खोज हृदय समीप ? ओ …
View More ” ओ गगन के जगमगाते दीप “” सवेरे — सवेरे खाली पेट पानी पीने के चमत्कारी फायदे “
हमारे शरीर के लिए पानी बहुत महत्वपूर्ण अवयव है ! हमारे शरीर का, 60—65 प्रतिशत हिस्सा पानी है ! अगर इसकी कमी हो जाती है…
View More ” सवेरे — सवेरे खाली पेट पानी पीने के चमत्कारी फायदे “” गुणगान “
तेरे घर के द्वार बहुत हैं, किसमें होकर आऊँ मैं ? सब द्वारों पर भीड़ मची है , कैसे भीतर जाऊँ मैं ? द्वारपाल …
View More ” गुणगान “” विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष “
समय से पहले मरना होगा। – – – – – – – – – – अभी चेत लो, समय नहीं है, वृक्षारोपण करना होगा |…
View More ” विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष “” श्री निजानंद संप्रदाय के सिद्धांत “
पारब्रम्ह अक्षरातीत को ही अपना इष्ट मानते हैं ! वह अक्षरातीत युगल स्वरूप, परम किशोर, अनादि, अविनाशी व स्व लीला अद्वैत है ! दिव्य ब्रह्मपुर…
View More ” श्री निजानंद संप्रदाय के सिद्धांत “” है बहुत अंधियार अब सूरज निकलना चाहिए “
है बहुत अंधियार अब सूरज निकलना चाहिए , जिस तरह से भी हो ये मौसम बदलना चाहिए ! रोज़ जो चेहरे बदलते हैं लिबासों…
View More ” है बहुत अंधियार अब सूरज निकलना चाहिए “