” हम तो मस्त फ़क़ीर, हमारा कोई नहीं ठिकाना रे “

हम तो मस्त फकीर, हमारा कोई नहीं ठिकाना रे, जैसा अपना आना प्यारे, वैसा अपना  जाना  रे  !   रामघाट पर सुबह गुजारी प्रेमघाट  पर …

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” छींक ” ( बच्चों के लिए )

लल्ला  छींका  , लल्ली  छींकी, छींके   बल्ला   कल्ला   ! छींक  रहा  था  सारा  ही   घर  , हुआ   गली   में   हल्ला   ! सुनकर   हल्ला  ,  मोहन …

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