” स्वप्न झरे फूल से , मीत चुभे शूल से “

स्वप्न झरे फूल  से  , मीत  चुभे  शूल  से लुट  गये  सिंगार  सभी  बाग  के  बबूल  से और  हम  खड़े  खड़े  बहार  देखते  रहे   !…

View More ” स्वप्न झरे फूल से , मीत चुभे शूल से “