” चराग़ खुद ही बुझाया बुझा के छोड़ दिया “

चराग़ ख़ुद ही बुझाया बुझा के छोड़ दिया , वो गैर था उसे अपना बना के छोड़ दिया ! हज़ार चेहरे हैं मौजूद आदमी गायब…

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” गर्मी की रातों में “

गर्मी की रातों में जैसे रहता है पूर्णिमा का चाँद तुम मेरे हृदय की शांति में निवास करोगी आश्चर्य में डूबे मुझ पर तुम्हारी उदास…

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