चलो उनका हाल चाल लेते हैं , जिनका कोई नहीं है ! रात हो गई है , लेकिन सड़क किनारे बैठी माताजी सोई नहीं है…
View More ” अनजाने अपने “Author: YugVaibhav
” मेरो दरद न जाने कोय “
हे री मैं तो प्रेम– दीवानी, मेरो दरद न जाने कोय ! घायल की गति घायल जाने, जो कोई घायल होय ! जौहरि की…
View More ” मेरो दरद न जाने कोय “” सखि, वे मुझसे कहकर जाते “
सखि, वे मुझसे कहकर जाते, कह, तो क्या मुझको वे अपनी पथ— बाधा ही पाते ? मुझको बहुत उन्होंने माना फिर भी क्या पूरा …
View More ” सखि, वे मुझसे कहकर जाते “” सुबह सुबह “
सुबह—- सुबह तालाब के दो फेरे लगाए सुबह—– सुबह रात्रि शेष की भीगी दूबों पर नंगे पाँव चहलकदमी की सुबह —- सुबह हाथ—–…
View More ” सुबह सुबह “” मौन “
बैठ लें कुछ देर आओ , एक पथ के पथिक— से प्रिय , अंत और अनन्त के तम— गहन— जीवन घेर मौन मधु हो जाए…
View More ” मौन “” हौंसले हैं बुलंद “
उड़ने को हौंसले हैं बुलंद , रोक सको तो रोक लो ! सपनों को साकार करने को तैयार हैं हम उड़ने को तैयार हैं हम…
View More ” हौंसले हैं बुलंद “” मन बहुत सोचता है “
मन बहुत सोचता है कि उदास न हो पर उदासी के बिना रहा कैसे जाए ? शहर के दूर के तनाव— दबाव कोई सह …
View More ” मन बहुत सोचता है “” जो तुम आ जाते एक बार “
जो तुम आ जाते एक बार जो तुम आ जाते एक बार कितनी करुणा कितने संदेश पथ में बिछ जाते बन पराग गाता प्राणों …
View More ” जो तुम आ जाते एक बार “” स्वप्न झरे फूल से , मीत चुभे शूल से “
स्वप्न झरे फूल से , मीत चुभे शूल से लुट गये सिंगार सभी बाग के बबूल से और हम खड़े खड़े बहार देखते रहे !…
View More ” स्वप्न झरे फूल से , मीत चुभे शूल से “” लहरों का गीत “
सुन मधुर मरुत मुरली की ध्वनि गृह— पुलिन नान्ध , सुख से विव्हल, हम हुलस नृत्य करती हिल– हिल खस खस पड़ता उर से अंचल …
View More ” लहरों का गीत “