हो मधुर सपना तुम्हारा पलक पर यह स्नेह चुंबन पोंछ दे सब अश्रु के कण् नींद की मदिरा पिलाकर दे भुला जग क्रूर कारा …
View More ” हो मधुर सपना तुम्हारा “Author: YugVaibhav
” कर्म– बंधन “
” जीवात्मा कर्म का कर्त्ता और भोक्ता है। वही कर्म-बन्धन में बँध जाता है। उससे छूटने का उपाय भी गीता में वर्णित है। गीता का…
View More ” कर्म– बंधन “” लालच बुरी बला है “
एक बार एक बुढ्ढा आदमी तीन गठरी उठा कर पहाड़ की चोटी की ओर बढ़ रहा था। रास्ते में उसके पास से एक हष्ट –…
View More ” लालच बुरी बला है “” कर्ज़ “
विवाह के दो वर्ष हुए थे जब सुहानी गर्भवती होने पर अपने घर राजस्थान जा रही थी …पति शहर से बाहर थे … जिस रिश्ते…
View More ” कर्ज़ “” प्रेम और भक्ति में क्या अन्तर है ? “
प्रेम और भक्ति पर्यायवाची शब्द हैं ! दोनों की परिभाषा एक ही है ! दोनों में समर्पण का भाव होता है ! प्रेमी और भक्त…
View More ” प्रेम और भक्ति में क्या अन्तर है ? “” खामोशी “
एक खामोशी कह रही है दिल की सुन , पर कुछ तो सुन रूठ कर ऐसे जाना, पर मनाने पर वापस जरूर आना तुझे जाते …
View More ” खामोशी ““अमृत— कलश “
1—– छोटी— छोटी बातें दिल में रखने से बड़े— बड़े रिश्ते भी कमज़ोर पड़ जाते हैं ! 2—— अनुशासन के बिना जीवन में कोई…
View More “अमृत— कलश “” नहीं फूलते कुसुम….. “
नहीं फूलते कुसुम मात्र राजाओं के उपवन में अमित बार खिलते वे पुर से दूर कुंज— कानन में ! समझे कौन रहस्य ? प्रकृति का …
View More ” नहीं फूलते कुसुम….. “” डटकर चल …. “
कुछ करना है तो डटकर चल, थोड़ा दुनिया से हटकर चल ! लीक पर तो सभी चल लेते हैं , कभी इतिहास को पलटकर चल …
View More ” डटकर चल …. “” तुमसे मिलने के पहले … “
तुमसे मिलने के पहले, हर बार सोचता हूँ , इधर– उधर की बातों के अलावा , तुमसे वे सारी बातें सुनता , जो तुम्हारी अपनी …
View More ” तुमसे मिलने के पहले … “