” अब अन्तर में अवसाद नहीं “

अब अन्तर में अवसाद नहीं चापल्य नहीं उन्माद नहीं सूना — सूना सा जीवन है कुछ शोक नहीं आल्हाद नहीं तव स्वागत हित हिलता रहता…

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” ऐसी कोई लहर नहीं जो गिरती- उठती न हो “

ऐसी कोई लहर नहीं जो गिरती उठती न हो तूफानों से उलझ सुलझकर आगे बढ़ती न हो ! कुछ लोग सो गए हैं रातों की…

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” मत पूंछ इस जिंदगी में “

बेगाने होते लोग देखे अजनबी होता शहर देखा हर इंसान को यहाँ मैंने ख़ुद से ही बेखबर देखा ! रोते हुए नयन देखे मुस्कराता हुआ…

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