बहुत समय पहले की बात है। एक छोटे से गांव से कुछ लोग तीर्थयात्रा के लिए निकल पड़े। उस समय यात्रा करना आज की तरह…
View More ” अटूट विश्वास “Category: Uncategorized
” घर की खुशियाँ, बहुओं में प्यार “
दीपा और नीता दोनों जेठानी-देवरानी। दीपा नौकरी करती थी और नीता घर संभालती थी। भरा-पूरा परिवार था, सास-ससुर, दोनों के दो बच्चे कुल १० लोगों…
View More ” घर की खुशियाँ, बहुओं में प्यार “” ज़मीदार और संत “
एक गाँव के एक जमींदार ठाकुर बहुत वर्षों से बीमार थे। इलाज करवाते हुए कोई डॉक्टर कोई वैद्य नहीं छोड़ा कोई टोने टोटके करने वाला…
View More ” ज़मीदार और संत “” जो जैसा बोयेगा, उसे वैसा ही काटना भी पड़ेगा “
बहुत समय पहले की बात है। एक राज्य में राजा रघुवीर का शासन था। वे पराक्रमी और न्यायप्रिय तो थे, परंतु कभी-कभी क्रोध में आकर…
View More ” जो जैसा बोयेगा, उसे वैसा ही काटना भी पड़ेगा “” टूटता घर “
झुंझुनूं की जिला अदालत में उस दिन असामान्य खामोशी थी। कोर्ट रूम में बैठे लोगों की नजरें जज साहब पर टिकी थीं। तभी जज ने…
View More ” टूटता घर “” आखिरी मालकिन “
आज अम्मा बहुत सुबह उठ गई थीं। रात भर उन्हें ठीक से नींद भी नहीं आई थी। मन में एक अजीब-सी खुशी और हल्की-सी घबराहट…
View More ” आखिरी मालकिन “” हथौड़ा और चाबी “
शहर की तंग गलियों के बीच एक पुरानी ताले-चाबी की दुकान थी। वह दुकान वर्षों से लोगों की जरूरतें पूरी कर रही थी। आसपास के…
View More ” हथौड़ा और चाबी “” सच्ची मदद “
एक नन्हा परिंदा अपने परिवार-जनों से बिछड़ कर अपने आशियाने से बहुत दूर आ गया था । उस नन्हे परिंदे को अभी उड़ान भरने अच्छे…
View More ” सच्ची मदद “” रंगों से पहले अपने मन को रंगो “
“कश्तियाँ उन्हीं की डूबती हैं, जिनके ईमान डगमगाते हैं…” — यह पंक्ति अक्सर गाँव के बुजुर्ग हरिराम जी अपने शिष्य गुरु को सुनाया करते थे।…
View More ” रंगों से पहले अपने मन को रंगो “” खुशकिस्मत “
चालीस पार मोहन ने आखिर अपने आँफिस की सहकर्मी सुधा से शादी कर ही ली….सुधा जहां एक अनाथ लडकी थी अपने चाचा चाची के पास…
View More ” खुशकिस्मत “