” हर मुस्कान के पीछे अपनापन नहीं होता “

एक छोटे से शहर में सुंदर नाम का एक युवक रहता था। उसे बचपन से ही जानवरों से बहुत लगाव था। एक दिन उसे जंगल के किनारे एक छोटा-सा घायल साँप मिला। सुंदर उसे घर ले आया, उसकी मरहम-पट्टी की और प्यार से उसकी देखभाल करने लगा। धीरे-धीरे साँप पूरी तरह स्वस्थ हो गया, लेकिन अब वह सुंदर से इतना घुल-मिल गया था कि हर समय उसके साथ ही रहता।

सुंदर उसे अपने हाथों से खाना खिलाता, उसके साथ खेलता और रात को अपने बिस्तर के पास ही सुलाता। समय बीतता गया और साँप भी बड़ा होता गया। घर वाले कई बार उसे समझाते, “बेटा, साँप चाहे कितना भी पालतू क्यों न हो, उसकी प्रकृति नहीं बदलती।” लेकिन सुंदर मुस्कुराकर कहता, “यह मुझे कभी नुकसान नहीं पहुँचाएगा। यह मुझसे बहुत प्यार करता है।”

एक दिन अचानक साँप ने खाना खाना बंद कर दिया। कई दिन बीत गए, लेकिन उसने एक निवाला भी नहीं खाया। वह चुपचाप सुंदर के पास लेटा रहता। सुंदर बहुत परेशान हो गया। उसे लगा कि शायद उसका प्रिय साथी किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा है।

वह तुरंत साँप को पशु चिकित्सक के पास ले गया। डॉक्टर ने ध्यान से उसकी जाँच की। कुछ देर सोचने के बाद उन्होंने सुंदर से पूछा, “क्या यह साँप रात में तुम्हारे साथ ही सोता है?”

सुंदर ने कहा, “जी हाँ।”

डॉक्टर ने फिर पूछा, “क्या यह तुम्हारे बिल्कुल पास लेटकर अपने पूरे शरीर को सीधा और लंबा फैलाता है?”

सुंदर ने आश्चर्य से कहा, “हाँ डॉक्टर साहब! हर रात ऐसा ही करता है। मैं समझता था कि शायद दर्द के कारण ऐसा करता होगा।”

डॉक्टर ने गंभीर स्वर में कहा, “बेटा, यह बीमार नहीं है। यह तुम्हें नुकसान पहुँचाने की तैयारी कर रहा है। वह अपने शरीर को तुम्हारी लंबाई के बराबर नाप रहा है, ताकि यह जान सके कि वह तुम्हें पूरा निगल पाएगा या नहीं। खाना इसलिए नहीं खा रहा, क्योंकि वह अपने अगले बड़े शिकार के लिए खुद को तैयार कर रहा है।”

यह सुनते ही सुंदर के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। जिस जीव को वह अपना सबसे सच्चा साथी समझता था, वही उसके जीवन के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका था। उसकी आँखों में आँसू आ गए। उसे पहली बार समझ आया कि केवल हमारा प्रेम किसी के स्वभाव को नहीं बदल सकता।

उस दिन सुंदर ने साँप को सुरक्षित तरीके से जंगल में छोड़ दिया। लौटते समय उसके मन में एक गहरी सीख अंकित हो चुकी थी।

जीवन में हर वह व्यक्ति, जो हर समय आपके साथ रहता है, आपका हितैषी हो—यह आवश्यक नहीं। कुछ लोग मुस्कुराते हुए भी आपके विश्वास, सफलता और खुशियों को निगलने का अवसर तलाशते रहते हैं। इसलिए प्रेम करें, विश्वास भी करें, लेकिन विवेक और सतर्कता कभी मत छोड़ें।

भावुकता अच्छी बात है, लेकिन बिना समझदारी के किया गया विश्वास कभी-कभी सबसे बड़ा धोखा बन जाता है। सच्चे मित्र वही हैं जो आपके जीवन को सुरक्षित, सुखी और बेहतर बनाते हैं, न कि आपकी सरलता का लाभ उठाते हैं।

 

* राम कुमार दीक्षित, पत्रकार      !

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