” रंगों से पहले अपने मन को रंगो “

“कश्तियाँ उन्हीं की डूबती हैं, जिनके ईमान डगमगाते हैं…” — यह पंक्ति अक्सर गाँव के बुजुर्ग हरिराम जी अपने शिष्य गुरु को सुनाया करते थे।…

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” होलिका दहन “( वर्तमान समय की सच्चाई “

शहर के बीचों-बीच बने एक बड़े मैदान में हर साल की तरह इस बार भी होलिका दहन की तैयारियाँ चल रही थीं। रंग-बिरंगी झालरों से…

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