शहर की तंग गलियों के बीच एक पुरानी ताले-चाबी की दुकान थी। वह दुकान वर्षों से लोगों की जरूरतें पूरी कर रही थी। आसपास के लोग अपने घरों के लिए नए ताले खरीदने आते थे और कभी-कभी जब किसी की चाबी खो जाती, तो वहीं डुप्लीकेट चाबी भी बनवाई जाती थी। दुकान के अंदर तरह-तरह के ताले और छोटी-बड़ी चाबियाँ रखी रहती थीं।
दुकान में एक भारी-भरकम हथौड़ा भी रखा रहता था। जब कोई ताला बहुत ज्यादा जाम हो जाता या किसी कारण से उसे खोलना संभव नहीं होता, तब दुकानदार उसी हथौड़े की मदद से ताले को तोड़ देता था। हथौड़ा अपनी ताकत पर बहुत गर्व करता था। उसे लगता था कि दुकान में उससे अधिक शक्तिशाली कोई नहीं है।
लेकिन हथौड़े के मन में एक बात हमेशा खटकती रहती थी। वह अक्सर देखता कि छोटी-सी पतली चाबी बड़ी आसानी से मजबूत से मजबूत ताले को खोल देती है, जबकि उसे ताला तोड़ने के लिए कई बार जोर-जोर से प्रहार करने पड़ते हैं।
एक दिन जब रात को दुकान बंद हो गई और चारों ओर सन्नाटा छा गया, तो हथौड़े से रहा नहीं गया। उसने पास पड़ी एक छोटी-सी चाबी से पूछा,
“बहन, तुम इतनी छोटी और कमजोर हो, फिर भी बड़े-बड़े मजबूत ताले बड़ी आसानी से खोल देती हो। मैं इतना ताकतवर हूँ, लेकिन मुझे ताला खोलने के लिए कई बार जोर से प्रहार करना पड़ता है। आखिर तुम्हारे अंदर ऐसी कौन-सी शक्ति है जो मेरे पास नहीं है?”
चाबी मुस्कुराई और शांत स्वर में बोली,
“भैया, बात ताकत की नहीं, तरीके की है। तुम ताले को खोलने के लिए उस पर जोर-जबरदस्ती करते हो। तुम उसके ऊपर प्रहार करते हो, इसलिए ताला खुलता नहीं बल्कि टूट जाता है। लेकिन मैं ताले को कोई चोट नहीं पहुँचाती। मैं धीरे-धीरे उसके भीतर जाती हूँ, उसके मन और हृदय को समझती हूँ। जब मैं उसके दिल तक पहुँच जाती हूँ और उससे खुलने का निवेदन करती हूँ, तो वह स्वयं ही खुल जाता है।”
चाबी की यह बात सुनकर हथौड़ा कुछ देर के लिए शांत हो गया। उसे समझ में आने लगा कि केवल ताकत ही हर समस्या का समाधान नहीं होती।
यह कहानी हमें जीवन का एक महत्वपूर्ण संदेश देती है। मनुष्य जीवन में भी अक्सर हम अपनी बात मनवाने के लिए कठोर शब्दों या दबाव का सहारा लेते हैं। कभी-कभी इससे काम तो हो जाता है, लेकिन संबंध टूट जाते हैं। जैसे हथौड़ा ताले को खोलता नहीं बल्कि तोड़ देता है, उसी तरह कठोरता से हम लोगों के दिल भी तोड़ देते हैं।
इसके विपरीत यदि हम किसी के दिल में प्रेम, सम्मान और समझदारी के साथ जगह बनाते हैं, तो वह व्यक्ति स्वयं ही हमारा सहयोग करने लगता है। प्रेम और मधुर व्यवहार से हम न केवल लोगों का विश्वास जीतते हैं, बल्कि उनके साथ स्थायी और मजबूत संबंध भी बना लेते हैं।
इसलिए जीवन में हमेशा यह याद रखना चाहिए कि ताकत से हम किसी को झुका तो सकते हैं, लेकिन प्रेम से ही किसी का दिल जीता जा सकता है।
जो चीज़ बल से प्राप्त की जा सकती है, उसे प्रेम से भी पाया जा सकता है; लेकिन जो प्रेम से प्राप्त होती है, वह बल से कभी नहीं मिल सकती।
*राम कुमार दीक्षित, पत्रकार !
