” हवा गुज़र गयी पत्ते थे कुछ हिले भी नहीं “

हवा गुज़र गयी पत्ते थे कुछ हिले भी नहीं , वो मेरे शहर में आये भी और मिले भी नही ! ये कैसा रिश्ता हुआ…

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