” अवसर को पहचान लेना “

वनवास के दिनों की बात है। भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण वन में एक आश्रम के पास निवास कर रहे थे। एक दिन श्रीराम और लक्ष्मण वन में भ्रमण करते हुए एक नदी के किनारे पहुँचे। अचानक आकाश में काले बादल छा गए और देखते ही देखते तेज वर्षा होने लगी।

पहाड़ों से पानी उतरकर नदी में आने लगा। कुछ ही समय में नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा। आसपास रहने वाले वनवासी अपने परिवार और सामान को लेकर ऊँचे स्थानों की ओर जाने लगे।

लक्ष्मण ने चिंता से श्रीराम की ओर देखा और बोले,
“भैया! नदी का पानी बहुत तेजी से बढ़ रहा है। हमें भी सुरक्षित स्थान पर चलना चाहिए।”

श्रीराम मुस्कुराए और बोले,
“लक्ष्मण, चिंता मत करो। जब तक मनुष्य अपना धर्म और कर्तव्य निभाता है, उसे भयभीत होने की आवश्यकता नहीं।”

लक्ष्मण ने कहा,
“भैया, भगवान पर विश्वास रखना अच्छी बात है, लेकिन यदि भगवान स्वयं कोई रास्ता हमारे सामने रखें तो उसे स्वीकार करना भी तो हमारा कर्तव्य है।”

श्रीराम ने लक्ष्मण की ओर देखा और मुस्कुराते हुए बोले,
“तुमने बहुत बड़ी बात कह दी, लक्ष्मण।”

उसी समय एक वनवासी उनके पास आया। उसने कहा,
“प्रभु! पहाड़ी के ऊपर सुरक्षित स्थान है। आप दोनों मेरे साथ चलिए।”

श्रीराम ने तुरंत उस वनवासी का धन्यवाद किया और उसके साथ चल पड़े।

रास्ते में लक्ष्मण ने पूछा,
“भैया, आपने उस व्यक्ति की बात तुरंत क्यों मान ली?”

श्रीराम बोले,
“क्योंकि लक्ष्मण, ईश्वर हमेशा स्वयं सामने आकर यह नहीं कहते कि ‘मैं तुम्हारी सहायता करने आया हूँ।’ कई बार वह किसी मनुष्य के रूप में, किसी सलाह के रूप में, किसी अवसर के रूप में हमारे सामने आते हैं।”

लक्ष्मण शांत होकर उनकी बात सुनते रहे।

कुछ दूर चलने के बाद उन्हें एक घायल वृद्ध मिला, जो रास्ते में गिरा हुआ था। लक्ष्मण उसे उठाकर सुरक्षित स्थान तक ले जाने लगे।

श्रीराम ने कहा,
“लक्ष्मण, आज तुम्हें अपने जीवन का दूसरा अवसर मिला है।”

लक्ष्मण ने आश्चर्य से पूछा,
“दूसरा अवसर?”

श्रीराम बोले,
“हाँ। पहला अवसर था जब उस वनवासी ने हमें सुरक्षित स्थान का रास्ता बताया। दूसरा अवसर यह है कि तुम्हारे सामने एक असहाय व्यक्ति आया और तुम्हें उसकी सेवा करने का मौका मिला। सेवा करने का अवसर भी भगवान की कृपा ही है।”

कुछ समय बाद वर्षा रुक गई और संकट टल गया।

श्रीराम ने लक्ष्मण से कहा—

“लक्ष्मण, मनुष्य अक्सर भगवान से प्रार्थना करता है कि संकट के समय भगवान उसे बचाने आएँ। लेकिन जब भगवान किसी इंसान के रूप में मदद भेजते हैं, किसी अवसर का द्वार खोलते हैं या किसी के माध्यम से सही रास्ता दिखाते हैं, तब मनुष्य उसे पहचान नहीं पाता।”

“याद रखना लक्ष्मण, ईश्वर पर विश्वास का अर्थ यह नहीं कि हम हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहें। विश्वास का अर्थ है—ईश्वर द्वारा दिए गए अवसर को पहचानना और सही समय पर सही कर्म करना।”

लक्ष्मण ने श्रीराम के चरणों में प्रणाम किया।

उस दिन उन्हें समझ आया कि जीवन में अवसर बार-बार नहीं आते। कभी कोई व्यक्ति रास्ता दिखाकर चला जाता है, कभी कोई परिस्थिति हमें आगे बढ़ने का मौका देती है और कभी कोई छोटी-सी घटना हमारे जीवन की दिशा बदल देती है।

इसलिए भगवान से केवल यह मत कहिए कि “हे प्रभु, मेरी मदद करने आओ।”
बल्कि यह भी पहचानिए कि जब मदद आपके दरवाजे पर आए, तो कहीं आप उसे ठुकरा तो नहीं रहे।

क्योंकि कई बार भगवान चमत्कार नहीं करते—वे हमें एक अवसर देते हैं।
और उस अवसर को पहचान लेना ही सबसे बड़ा चमत्कार होता है।

 

* राम कुमार दीक्षित, पत्रकार       !

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