ब्यूरो ओमप्रकाश श्रीवास्तव
बाराबंकी। जनपद के हैदरगढ़ कोतवाली क्षेत्र स्थित बारा टोल प्लाजा पर प्रयागराज हाईकोर्ट के एक अधिवक्ता के साथ हुई मारपीट की घटना लगातार तूल पकड़ती जा रही है। 14 जनवरी को हुई इस घटना के बाद अधिवक्ताओं में भारी आक्रोश व्याप्त है और पुलिस की प्रारंभिक कार्रवाई से असंतोष जताया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रतापगढ़ जनपद के परानूपुर थाना हथिगवां निवासी अधिवक्ता रत्नेश कुमार शुक्ला, जो प्रयागराज हाईकोर्ट में अधिवक्ता हैं, 14 जनवरी को कार से लखनऊ जा रहे थे। आरोप है कि बारा टोल प्लाजा पर तैनात कर्मियों ने उनके साथ मारपीट की तथा इस दौरान उनकी सोने की अंगूठी भी छीन ली। घटना में अधिवक्ता गंभीर रूप से घायल हो गए।
पीड़ित अधिवक्ता की शिकायत पर पुलिस ने प्रारंभ में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने का आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में केवल शांतिभंग की धाराओं में चालान किए जाने की जानकारी सामने आने पर अधिवक्ता समुदाय में आक्रोश और बढ़ गया। इसी के विरोध में 15 जनवरी को हैदरगढ़, लखनऊ, बाराबंकी, प्रतापगढ़ और सुलतानपुर के सैकड़ों अधिवक्ताओं ने बारा टोल प्लाजा पहुंचकर प्रदर्शन किया।
अगले दिन अधिवक्ताओं ने टोल प्लाजा पर पहुंचकर जमकर तोड़फोड़ की, जिससे अफरा-तफरी मच गई। हालात बिगड़ने पर टोल कर्मियों को जान बचाकर भागना पड़ा। इस दौरान करीब आठ घंटे तक टोल प्लाजा पूरी तरह फ्री रहा और वाहनों से टोल नहीं वसूला गया। घटना से क्षेत्र की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए।
पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट लखनऊ हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं ने शुक्रवार 16 जनवरी को बाराबंकी पुलिस अधीक्षक कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। इस दौरान एडिशनल एसपी विकास चंद्र त्रिपाठी और क्षेत्राधिकारी संगम सिंह से वार्ता हुई, लेकिन अधिवक्ता पुलिस अधीक्षक से ही बातचीत की मांग पर अड़े रहे।
कुछ देर बाद
पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय स्वयं मौके पर पहुंचे और अधिवक्ताओं से संवाद किया। लखनऊ हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता देवकीनंदन पाण्डेय (पूर्व संयुक्त सचिव प्रशासन, अवध बार एसोसिएशन हाईकोर्ट लखनऊ) ने मांग रखते हुए कहा कि टोल प्लाजा पर तैनात सभी दोषी कर्मियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई की जाए।
इसके साथ ही संबंधित थाना पुलिस की भूमिका की जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई, मामले की विवेचना किसी वरिष्ठ अधिकारी से कराए जाने, टोल प्लाजा का लाइसेंस निरस्त कर ठेका समाप्त करने तथा भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सभी टोल प्लाजा संचालकों को कड़ी चेतावनी जारी करने की मांग की गई।
अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने शीघ्र ठोस कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। वहीं पुलिस अधीक्षक अर्पित विजयवर्गीय ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन देते हुए कहा कि किसी भी सम्मानित नागरिक, विशेषकर अधिवक्ताओं के साथ दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस मौके पर लखनऊ हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता देवकीनंदन पाण्डेय, अनिल कुमार मिश्रा, अमरदीप मिश्रा, गिरी बाबा, कामनी ओझा, सुनिधि जाटणी सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।
