Uncategorized ” नज़ारे छूट जाते हैं “ YugVaibhav November 1, 2025 No Comments मैं जब भी तेज़ चलता हूँ नज़ारे छूट जाते हैं ! कोई जब रूप गढ़ता है तो साँचे टूट जाते हैं ! मैं रोता हूँ तो आकर लोग कंधा थपथपाते हैं ! मैं हँसता हूँ तो अक्सर लोग मुझसे रूठ जाते हैं ! —– प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास ( संकलित ) —— राम कुमार दीक्षित, पत्रकार ! Post Views: 120