” नज़ारे छूट जाते हैं “

मैं  जब  भी  तेज़   चलता  हूँ

नज़ारे      छूट    जाते     हैं    !

कोई  जब  रूप   गढ़ता   है

तो     साँचे  टूट    जाते    हैं   !

मैं   रोता    हूँ  तो   आकर

लोग  कंधा   थपथपाते   हैं    !

मैं   हँसता   हूँ   तो   अक्सर

लोग   मुझसे   रूठ   जाते   हैं    !

—–  प्रसिद्ध कवि  कुमार विश्वास

( संकलित  )

 

——  राम कुमार दीक्षित, पत्रकार   !

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