कहकर उसे बताना क्या !
गुण का ग्राहक बनना लेकिन ,
गाकर उसे सुनाना क्या !
ले लेना सुगंध सुमनों की ,
तोड़ उन्हें मुरझाना क्या !
देकर हृदय हृदय पाने की ,
आशा व्यर्थ लगाना क्या !
—– प्रसिद्ध कवि हरिवंश राय बच्चन
( संकलित )
——– राम कुमार दीक्षित , पत्रकार !

