” आज तक हमसे न हमारी मुलाकात हुई “

आज  तक  हमसे  न  हमारी   मुलाकात  हुई   ,

अब  के  सावन  में  ये  शरारत  मेरे  साथ  हुई   !

 

अब  के  सावन  में  ये  शरारत  मेरे  साथ  हुई  ,

मेरा  घर  छोड़  के  कुल  शहर  में  बरसात   हुई   !

 

आप  मत  पूंछिये  क्या  हम  पे  सफर  में  गुज़री  , ?

था  लुटेरों  का  जहाँ    गाँव   वहीं  रात    हुई    !

 

ज़िंदगी  भर  तो  हुई  गुफ़्तगू  ग़ैरों  से   मगर  ,

आज तक  हमसे  न  हमारी  मुलाकात  हुई    !

—–  प्रसिद्ध कवि गोपालदास नीरज

( संकलित  )

 

——  राम कुमार दीक्षित,  पत्रकार  !

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