कवि समाज का दिग्दर्शक है: स्वामी मुक्तानंद सांस्कृतिक एकता के सूत्रधार थे महर्षि वाल्मीकि: महेश पांडेय

कवि समाज का दिग्दर्शक है: स्वामी मुक्तानंद सांस्कृतिक एकता के सूत्रधार थे महर्षि वाल्मीकि: महेश पांडेय
शरद पूर्णिमा व आदि कवि वाल्मीकि जयंति पर विचार एवं काव्य गोष्ठी संपन्न
हमीरपुर। शरद पूर्णिमा एवं आदि कवि महर्षि वाल्मीकि जयंती के उपलक्ष्य में अखिल साहित्य परिषद जिला इकाई के तत्वावधान में सुमेरपुर कस्बे के एक गेस्ट हाउस में विचार एवं कवि गोष्ठी संपन्न हुई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि परमहंस स्वामी डॉ मुक्तानंद जी महराज तथा विशिष्ट अतिथि डॉ महेश पांडेय बजरंग प्रदेश महामंत्री अखिल भारतीय साहित्य परिषद रहे। कार्यक्रम के अध्यक्ष हरीराम गुप्त निरपेक्ष रहे। संचालन कैलाश सोनी ने किया। गोष्ठी का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन तथा मां सरस्वती एवं महर्षि वाल्मीकि के चित्र पर पुष्पार्चन के साथ हुआ। कवि हरीराम गुप्त निरपेक्ष ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। निरपेक्ष जी ने इसी क्रम में रचना पढ़ी भू गर्भा ने जना शीत को, रवि के बीज मिनीकिट उगाने वाली, आई शरद सुहावन आली।, मानस प्रवक्ता आनंद कुमार सिंह परमार ने महर्षि वाल्मीकि जी के कृतित्व तथा स्मृति एवं बोध परंपरा पर अपने विचार व्यक्त किए। गणेश सिंह विद्यार्थी ने पढ़ा भारत भू में यदि महर्षि वाल्मीकि का अवतरण नहीं होता, तो कलियुग में मानस की रचना का संवरण नहीं होता।, प्रदेश महामंत्री डॉ महेश पांडेय बजरंग ने कहा सांस्कृतिक एकता के सूत्रधार थे महर्षि वाल्मीकि।, संरक्षक शिवकरन सिंह सरस ने पढ़ा दीन बंधु कृपा सिंधु नाथ कृपा कीजिए, मुझ अनाथ दीन को शरण में लीजिए।, आचार्य देव नारायण सोनी ने पढ़ा निम्नता से उच्चता के शिखर को छुआ, आदि काव्य लिख गए वाल्मीकि नाम हुआ।, हरीकिशन सेन आर्य ने पढ़ा रोटीराम महराज की कृपा से सब काम हो रहा है।, वरिष्ठ कवि नारायण प्रसाद रसिक ने पढ़ा मिल गए होते पहले संत वाल्मीकि को, मार मार पथिक को धन क्यों लूटता।, गजेन्द्र नारायण दीक्षित ने पढ़ा महा ऋषि वाल्मीकि जी करता प्रथम प्रणाम, आदि कवि बन आपने किया विश्व में नाम।, एम एल अवस्थी ने पढ़ा ऋषियों के ए ईश्वर, तुम महर्षि कहलाए।, जिला महामंत्री कैलाश सोनी ने पढ़ा नमन कर बार बार ऋषि वाल्मीकि को, आदि कवि बन राम कथा रच गए।, कमलेश सिंह गौर ने पढ़ा रहबर बनके बीहड़ वाले पहुंच गये दरबारों में।, राजेंद्र प्रेमी ने पढ़ा जो हुए देश हित न्योछावर ये कलम उन्हीं का वंदन कर।, वीरेंद्र कुमार शजर ने पढ़ा लोग आंगन में भी दीवार बना देते हैं।, अवधेश साहू बेचैन ने पढ़ा प्रेम मिलता नहीं बाजारों में।, सुरेश भदौरिया ने पढ़ा प्रेम वेदों पुराणों का सब सार है।, नीतिराज सिंह ने पढ़ा अक्षर अक्षर बन विचार धारा अविरल बह जाती है।, हरीप्रकाश कुशवाहा कौशल ने पढ़ा मेरी मां मेरी भूख को अच्छी तरह जानती है।, शायर मोहम्मद सलीम ने पढ़ा दो प्रेमियों के प्यार का प्रतीक ताज है।
अंत में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्वामी मुक्तानंद जी महराज जी ने कहा कि कवि समाज का दिग्दर्शक है। उन्होंने महर्षि वाल्मीकि जी के संपूर्ण जीवन वृत पर प्रेरक प्रकाश डाला। स्वामी जी के आशीर्वचन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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