बहुत कुछ लिख लिख कर मिटाया है मैंने
ठीक ना होने पर भी ,
अपना हाल ठीक बताया है मैंने !
बात बात पर अपने दिल को
बहलाया है मैंने !
अपनी सोच में ही खोकर
ना जाने कितनी रातों को
जाग जाग कर बिताया है मैंने !
कोई समझेगा नहीं ये हाल मेरा ,
बस इसी फ़िक्र में सबसे सब कुछ छुपाया है मैंने !
( संकलित )
—- राम कुमार दीक्षित , पत्रकार !
