कौन उर की तंत्रियों पर
तुम अनश्वर गान गाते …
सुन रहा है यह मन अचंचल
प्रिय तुम्हारा स्वर मनोहर
विश्वमोहन रागिनी से
प्राणदायक द्रव रहा झर
ध्यान हो तनमय बनाते
सकल मन के दुख नसाते
कौन तुम विष वासना को
प्रेममय अमृत पिलाते
कौन तुम वीणा बजाते ?
—- प्रसिद्ध कवि फणीश्वर नाथ रेणु
( संकलित )
—- राम कुमार दीक्षित, पत्रकार !

