चराग़ ख़ुद ही बुझाया बुझा के छोड़ दिया ,
वो गैर था उसे अपना बना के छोड़ दिया !
हज़ार चेहरे हैं मौजूद आदमी गायब ,
ये किस खराबे में दुनिया ने लाके छोड़ दिया !
मैं जा चुका हूँ मेरे वास्ते उदास न हो ,
मैं वो हूँ तू ने जिसे मुस्करा के छोड़ दिया !
किसी ने ये न बताया कि फासला क्या है ,
हर एक ने मुझे रास्ता दिखा के छोड़ दिया !
वो तेरा रोग भी है और तेरा इलाज भी है ,
उसी को ढूँढ जिसे तंग आ के छोड़ दिया !!
( संकलित )
—- राम कुमार दीक्षित, पत्रकार !
