गणतंत्र दिवस फिर आया है !
नव परिधान बसंती रंग का
माता ने पहनाया है !
भीड़ बढ़ी स्वागत करने को
बादल झड़ी लगाते हैं !
रंग– बिरंगे फूलों में ,
ऋतुराज खड़े मुस्काते हैं !
धरती मां ने धानी साड़ी
पहन श्रृंगार सजाया है !
गणतंत्र दिवस फिर आया है !
भारत की इस अखंडता को
तिल भर आंच न आने पाए !
हिंदू , मुस्लिम, सिख, ईसाई
मिलजुल इसकी शान बढ़ाएं !
युवा वर्ग सक्षम हाथों में
आगे इसको सदा बढ़ाएं !
इसकी रक्षा में वीरों ने ,
अपना रक्त बहाया है !
गणतंत्र दिवस फिर आया है ! ( सं )
———- राम कुमार दीक्षित, पत्रकार , पुणे !
