इश्क की बातें , प्यार की बातें
छोड़ो अब बेकार की बातें !
फूलों जैसे बच्चे भी अब ,
करते हैं , तलवार की बातें !
सुनते सुनते डूब गये हम ,
कश्ती और पतवार की बातें !
इस जग में हम ढूँढ रहे हैं ,
जाने किस संसार की बातें !
रोज़ उन्हीं लोगों से मिलना ,
रोज़ वही हर बार की बातें !
बातों से ही सारी बातें ,
देखो कैसी कैसी बातें !
——— राम कुमार दीक्षित , पत्रकार , पुणे, महारास्ट्र !
