बहुत समय पहले की बात है। एक गाँव में चार वृद्ध महिलाएँ रहती थीं। एक दिन उनके बीच इस बात को लेकर विवाद हो गया कि उन चारों में सबसे बड़ी कौन है। काफी देर तक बहस होती रही, लेकिन कोई भी अपनी बात से पीछे हटने को तैयार नहीं थी।
अंत में चारों ने निर्णय लिया कि गाँव में नई आई बहू के पास चलकर इस विवाद का समाधान करवाया जाए। चारों महिलाएँ बहू के पास पहुँचीं और बोलीं, “बेटी! हमारे बीच एक विवाद है। तुम ही बताओ कि हम चारों में सबसे बड़ी कौन है?”
बहू ने मुस्कुराते हुए कहा, “माताओं! पहले आप सभी अपना-अपना परिचय दीजिए। उसके बाद मैं अपना निर्णय सुनाऊँगी।”
पहली वृद्ध महिला बोली, “बेटी! मैं भूख हूँ। मेरे बिना कोई मनुष्य जीवित नहीं रह सकता। इसलिए मैं सबसे बड़ी हूँ।”
बहू ने उत्तर दिया, “माताजी! भूख मिटाने के अनेक उपाय हैं। कोई छप्पन प्रकार के पकवान खाकर अपनी भूख मिटाता है, तो कोई सूखी रोटी खाकर भी संतुष्ट हो जाता है। इसलिए आपका विकल्प मौजूद है।”
दूसरी वृद्ध महिला ने कहा, “मैं प्यास हूँ। मेरे बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। इसलिए सबसे बड़ी मैं हूँ।”
बहू बोली, “माताजी! प्यास कभी शुद्ध जल से बुझती है, तो कभी कठिन परिस्थितियों में मनुष्य साधारण जल से भी संतुष्ट हो जाता है। इसलिए आपका भी विकल्प है।”
तीसरी वृद्ध महिला बोली, “मैं नींद हूँ। मेरे बिना मनुष्य थककर टूट जाएगा। अतः सबसे बड़ी मैं हूँ।”
बहू ने कहा, “माताजी! नींद आरामदायक बिस्तर पर भी आ सकती है और परिस्थितियाँ विपरीत हों तो मनुष्य जमीन पर भी सो सकता है। इसलिए आपका भी विकल्प है।”
अब चौथी वृद्ध महिला आगे आई और बोली, “बेटी! मैं आशा हूँ। क्या अब तुम बता सकती हो कि मैं सबसे बड़ी हूँ या नहीं?”
जैसे ही बहू ने आशा का नाम सुना, वह सम्मानपूर्वक उठी और उनके चरणों में झुक गई। फिर बोली, “माताजी! आप सबसे बड़ी हैं। क्योंकि भूख, प्यास और नींद के बिना मनुष्य कुछ समय तक संघर्ष कर सकता है, लेकिन जब जीवन से आशा ही समाप्त हो जाती है, तब उसका आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की इच्छा भी कमजोर पड़ने लगती है।”
बहू ने आगे कहा, “जिस गरीब को विश्वास है कि एक दिन उसकी परिस्थितियाँ बदलेंगी, वह मेहनत करता रहता है। जिस विद्यार्थी को आशा है कि वह सफल होगा, वह असफलताओं के बाद भी पढ़ाई जारी रखता है। जिस किसान को विश्वास है कि उसकी मेहनत रंग लाएगी, वह कठिन मौसम में भी खेतों में पसीना बहाता रहता है।”
“लेकिन यदि मनुष्य ने पहले ही हार मान ली, तो उसके पास साधन होते हुए भी वह उनका सही उपयोग नहीं कर पाएगा। इसलिए आशा ही वह शक्ति है, जो मनुष्य को कठिन से कठिन परिस्थिति में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।”
चारों वृद्ध महिलाएँ बहू की बात सुनकर संतुष्ट हो गईं। उनके विवाद का अंत हो चुका था।
दोस्तों! जीवन में सुख और दुःख आते-जाते रहते हैं। कभी परिस्थितियाँ हमारे अनुकूल होती हैं, तो कभी ऐसा लगता है कि चारों ओर अँधेरा छा गया है। लेकिन हमें याद रखना चाहिए कि कोई भी परिस्थिति हमेशा नहीं रहती।
दुःख हमें धैर्य सिखाता है, असफलता हमें अनुभव देती है और संघर्ष हमारी क्षमताओं को पहचानने का अवसर देता है। जिस प्रकार घने बादलों के पीछे सूर्य छिप जाता है, लेकिन उसका प्रकाश समाप्त नहीं होता, उसी प्रकार जीवन की कठिनाइयों के बीच हमारी संभावनाएँ भी समाप्त नहीं होतीं।
इसलिए जब भी जीवन में कोई संकट आए, तो घबराकर हार मत मानिए। अपने ऊपर विश्वास रखिए, मेहनत करते रहिए और उम्मीद का दीपक जलाए रखिए।
याद रखिए, तूफान कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, वह हमेशा नहीं रहता। रात कितनी भी लंबी क्यों न हो, सुबह अवश्य होती है।
जीवन में जो प्राप्त है, उसका सम्मान कीजिए, जो नहीं मिला उसके लिए प्रयास कीजिए और जो कठिन है, उसका सामना साहस के साथ कीजिए।
क्योंकि आशा मनुष्य की शक्ति है, विश्वास उसका सहारा है और निरंतर प्रयास उसकी सफलता का मार्ग है।
सदा प्रसन्न रहिए, सकारात्मक सोचिए और जीवन में आगे बढ़ते रहिये !
* राम कुमार दीक्षित, पत्रकार !
