ज़िंदगी अब पहले जैसी नहीं रही…
पहले लोग खुसियाँ बाँटते थे, अब स्टेटस अपडेट करते हैं।
पहले चिट्ठियाँ लिखी जाती थीं, अब मैसेज पढ़ने के बाद भी जवाब नहीं आता।
हम तकनीक में बहुत आगे बढ गए हैं,
पर भावनाओं में कहीं पीछे रह गए हैं।
हर कोई बहुत जल्दी में है,
मगर किसी को मालूम नहीं कि मंज़िल कहाँ है और जाना कहाँ है ?
आज की ज़िंदगी ने हमें सिखा दिया है —
कि “ऑनलाइन” रहना ज़रूरी है,
भले ही दिल “ऑफ़लाइन” क्यों न हो जाए।
अब रिश्ते भी नेटवर्क की तरह हैं,
सिग्नल अच्छा मिला तो बात बन जाती है,
वरना ” लॉस्ट सीन ” दिखा देता है जीवन।
कभी-कभी लगता है,
हम इंसान नहीं, एक अपडेटेड मशीन बन गए हैं —
जिसे हर सुबह चार्ज करना पड़ता है,
पर फिर भी दिल की बैटरी लो रहती है।
हम हँसते हैं, पर सुकून नहीं मिलता ,
हम बोलते हैं, पर सुनता कोई नहीं,
हम दिखते हैं साथ, पर महसूस होता है, सब अकेले हैं।
आज की ज़िंदगी हमें सिखाती है —
कि सबसे बड़ी दौलत “सच्चे लोग” हैं,
जो बिना किसी कारण बस आपके अपने बने रहते हैं।
चलो ज़रा रुकें, गहरी साँस लें,
किसी से अपने दिल की बात करें और दूसरे की दिल की बातें सुनें
और याद रखें —
ज़िंदगी “वायरल” नहीं, “वास्तविक” होने में सुंदर है। लोगोँ को प्यार एवं सेवा देने में ही जीवन का सच्चा आनंद है !
* राम कुमार दीक्षित, पत्रकार !

