” बुराई को जड़ से दूर करना चाहिए “

बुराई की ऊपरी कांट-छांट से वह नहीं मिटती,उसे तो  उसकी जड़ से मिटाना होता है। जब तक जड़ को नष्ट नहीं किया जाएगा तब तक कोई लाभ नहीं होगा।

किसी गाँव में एक आदमी रहता था। उसके आँगन में एक पौधा उग आया। कुछ दिनों बाद वह बड़ा हो गया  और उस पर फल लगने लगे। एक बार एक फल पककर नीचे गिर गया। उस फल को एक कुत्ते ने खा लिया। जैसे ही कुत्ते ने फल खाया, उसके प्राण निकल गए। आदमी ने सोचा–कोई बात होगी जिससे कुत्ता मर गया। पर उसने पेड़ के फल पर ध्यान नहीं दिया।

कुछ समय बाद उधर से एक भैंस निकली। ज़मीन पर गिरा हुआ फल देखकर उसने भी फल खा लिया । फल को खाते ही भैंस की भी मृत्यु हो गई ! यह देखकर आस पास के लोग दुखी हो गए । मरी हुई भैंस को देख कर आदमी की समझ में आ गया कि यह जहरीला पेड़ है। उसने कुल्हाड़ी ली और वृक्ष के सारे फल काटकर गिरा दिए। थोड़े दिन बाद पेड़ में फिर फल लग गए। लेकिन इस बार पहले से भी ज्यादा बड़े फल लगे थे। आदमी ने फिर कुल्हाड़ी से फल के साथ-साथ शाखाओं को भी काट दिया। परंतु कुछ दिन बाद पेड़ फिर फलों से लद गया। ऐसा देखकर आदमी की समझ में कुछ नहीं आया। वह परेशान हो गया। तभी उसके आस पास के लोगों ने उसे देखा और उसकी परेशानी का कारण पूछा। आदमी ने सारी बातें बता दी।

यह सब सुनकर लोगों ने कहा –तुमने पेड़ के फल तोड़े,उसकी शाखाएं काटी , पर तुम्हारी समझ में नहीं आया कि जब तक पेड़ की जड़ रहेगी तब तक पेड़ रहेगा और उसमें फल आते रहेंगे। अगर तुम इससे छुटकारा चाहते हो तो इसकी जड़ काटो। तब आदमी की समझ में आया कि बुराई की ऊपरी कांट-छांट से वह नहीं मिटती,उसे तो उसकी जड़ से मिटाना चाहिए। उसने कुल्हाड़ी लेकर पेड़ की जड़ को काट दिया और हमेशा के लिए चिंता मुक्त हो गया।

इसी तरह बुराई की जड़ हमारे मन में होती है। जब तक जड़ को नष्ट नहीं किया जाएगा, मनुष्य को जहरीला बनाने वाले फल आते रहेंगे। अतः मन को नियंत्रण मे रखना चाहिए !

* राम कुमार दीक्षित, पत्रकार       !

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