एक नगर में एक युवक रहता था। उसकी आदतें अच्छी नहीं थीं। वह चोरी करके अपना जीवन चलाता था। कई लोगों ने उसे समझाया, लेकिन उसकी आदत नहीं बदली। एक दिन वह एक संत के सत्संग में पहुँचा। संत के मुख से निकले ज्ञान के शब्द उसके हृदय को छू गए।
सत्संग समाप्त होने के बाद युवक संत के पास गया और बोला, “गुरुदेव, मैं चोरी करता हूँ। यह काम मैं तुरंत नहीं छोड़ सकता, लेकिन मैं आपके बताए मार्ग पर चलना चाहता हूँ। मुझे कोई ऐसा नियम बताइए जिसे मैं निभा सकूँ।”
संत मुस्कुराए और बोले, “यदि तुम सच में कुछ करना चाहते हो तो आज से हर स्त्री को माता या बहन के समान सम्मान देना।”
युवक ने वचन दे दिया और अपने जीवन में उस नियम को अपनाने का निश्चय कर लिया।
कुछ समय बाद एक रात वह चोरी के इरादे से एक बड़े घर में पहुँचा। वहाँ एक महिला अकेली रहती थी। युवक ने सोचा कि आज उसे बहुत धन मिलेगा। लेकिन जब उस महिला ने उसे देखा, तो उसने उसे अपने पास बुलाया और कहा, “यदि तुम मेरी एक इच्छा पूरी कर दो, तो मैं तुम्हें इतना धन दूँगी कि तुम्हें फिर कभी चोरी नहीं करनी पड़ेगी।”
युवक एक पल के लिए डगमगाया, लेकिन तभी उसे अपने गुरु का दिया हुआ वचन याद आ गया। उसने तुरंत हाथ जोड़कर कहा, “माता जी, मैं आपको अपनी माँ के समान मानता हूँ। मैं ऐसा कोई कार्य नहीं कर सकता जिससे मेरे गुरु का आदेश टूट जाए।”
महिला उसकी बात सुनकर भावुक हो गई। उसी समय घर के मालिक और कुछ लोग भी वहाँ आ गए, जो छिपकर सब देख रहे थे। उन्होंने युवक की सच्चाई और चरित्र की दृढ़ता देख ली थी।
घर के मालिक ने कहा, “तुम चोरी करने आए थे, फिर भी अपने सिद्धांत से नहीं डिगे। यह बताता है कि तुम्हारे भीतर अच्छाई जीवित है।”
उसने युवक को दंड देने के बजाय सम्मान दिया, काम दिया और उसे ईमानदारी से जीवन जीने का अवसर प्रदान किया। धीरे-धीरे युवक ने चोरी छोड़ दी और मेहनत के बल पर समाज में सम्मानित व्यक्ति बन गया।
एक दिन वह फिर अपने गुरु के पास पहुँचा और उनके चरणों में गिर पड़ा। उसकी आँखों में कृतज्ञता के आँसू थे। उसने कहा, “गुरुदेव, आपके एक छोटे से वचन ने मेरा पूरा जीवन बदल दिया।”
गुरु ने मुस्कुराकर कहा, “बेटा, सफलता बड़े उपदेशों से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे अच्छे नियमों का पालन करने से मिलती है।”
जीवन में यदि हम किसी श्रेष्ठ गुरु, माता-पिता या सज्जन व्यक्ति की एक अच्छी सीख को भी पूरी निष्ठा से अपना लें, तो हमारा भाग्य बदल सकता है। दृढ़ विश्वास, अच्छे संस्कार और सही मार्गदर्शन मनुष्य को अंधकार से निकालकर सफलता, सम्मान और सुख के शिखर तक पहुँचा देते हैं।
* राम कुमार दीक्षित, पत्रकार !
