एक दिन एक विद्वान अध्यापक अपने शिष्यों के साथ प्रकृति की सैर पर निकले। रास्ता हरियाली से भरा था, पक्षियों की मधुर आवाजें वातावरण को और भी मनमोहक बना रही थीं। चलते-चलते अध्यापक अपने शिष्यों को जीवन के महत्वपूर्ण सिद्धांत समझा रहे थे। उन्होंने कहा, “बच्चों, जीवन में संगत का बहुत बड़ा महत्व होता है। जैसी संगत होगी, वैसा ही हमारा स्वभाव और चरित्र बनता है।”
शिष्य ध्यान से सुन तो रहे थे, लेकिन उनके मन में यह बात पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पा रही थी। वे सोच रहे थे कि आखिर संगत का इतना असर कैसे हो सकता है। तभी अध्यापक की नजर रास्ते के किनारे लगे एक सुंदर गुलाब के पौधे पर पड़ी, जो खिले हुए फूलों से लदा था और उसकी सुगंध दूर तक फैल रही थी।
अध्यापक ने एक शिष्य को बुलाकर कहा, “जाओ, इस पौधे के नीचे से थोड़ा-सा मिट्टी का ढेला उठाकर लाओ।”
शिष्य तुरंत गया और मिट्टी का ढेला लेकर वापस आया।
अध्यापक ने मुस्कुराते हुए कहा, “अब इसे सूंघो और बताओ कैसी गंध आ रही है।”
शिष्य ने जैसे ही मिट्टी को सूंघा, वह आश्चर्यचकित हो गया और बोला, “गुरुजी! इसमें से तो गुलाब की बहुत ही सुगंधित खुशबू आ रही है।”
तब अध्यापक ने सभी शिष्यों की ओर देखकर कहा, “यही है संगत का असर। यह साधारण मिट्टी है, लेकिन यह गुलाब के फूलों के पास रहने के कारण खुद भी सुगंधित हो गई है। रोज़ इस पर गुलाब की पंखुड़ियाँ गिरती हैं, इसलिए इसमें भी वही खुशबू बस गई है।”
उन्होंने आगे समझाया, “ठीक इसी प्रकार, मनुष्य भी अपनी संगति से प्रभावित होता है। यदि वह अच्छे, सज्जन और सकारात्मक विचारों वाले लोगों के साथ रहेगा, तो उसमें भी वही अच्छे गुण आ जाएंगे। लेकिन यदि वह बुरी संगति में रहेगा, तो उसके अंदर भी बुरे विचार और आदतें घर कर लेंगी।”
शिष्य अब पूरी तरह समझ चुके थे। उन्हें एहसास हुआ कि संगत केवल साथ रहने का नाम नहीं है, बल्कि यह हमारे व्यक्तित्व को गहराई से प्रभावित करती है।
अध्यापक ने अंत में कहा, “इसलिए हमेशा ऐसी संगत चुनो जो तुम्हें ऊँचाइयों तक ले जाए, तुम्हारे अंदर अच्छे संस्कार और सकारात्मक सोच विकसित करे। क्योंकि सही संगत ही जीवन को सफल और सार्थक बनाती है।”
उस दिन के बाद सभी शिष्यों ने यह संकल्प लिया कि वे हमेशा अच्छी संगत में रहेंगे और अपने जीवन को सुगंधित बनाएंगे, ठीक उसी मिट्टी की तरह जो गुलाब के साथ रहकर महक उठी थी।
अच्छी संगत इंसान को महान बनाती है, जबकि बुरी संगत उसे पतन की ओर ले जाती है। इसलिए जीवन में हमेशा सही लोगों का साथ चुनें।
* राम कुमार दीक्षित, पत्रकार
