श्रृंगवेरपुर की जल्द बदलेगी तस्वीर, 70 फीसदी पूरा हुआ निषादराज गुह्य सांस्कृतिक केंद्र का निर्माण

लखनऊ: रामनगरी अयोध्या की तर्ज पर प्रभु श्रीराम के परम भक्त निषादराज की राजधानी श्रृंगवेरपुर को भव्य और आकर्षक रूप दिया जा रहा है। प्रयागराज जिले के इस ऐतिहासिक व पौराणिक स्थल पर निषादराज गुह्य सांस्कृतिक केंद्र का निर्माण तेज गति से जारी है। उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग की इस महत्वाकांक्षी परियोजना की लागत 19.61 करोड़ रुपये है और लगभग 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है, जिससे स्पष्ट है कि सरकार इस परियोजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस सांस्कृतिक केंद्र की सबसे खास पहचान इसका म्यूजियम ब्लॉक है, जहां श्रीराम और निषादराज की अमर कथा चित्रों के माध्यम से जीवंत की जाएगी। यह संग्रहालय उनके आत्मीय संबंधों और सामाजिक समरसता की कहानी बताएगा। म्यूजियम ब्लॉक का ढांचा तैयार है, फिनिशिंग का काम जारी है और प्लास्टर कार्य पूरा हो चुका है।
इस परियोजना में लगभग 400 लोगों की क्षमता वाला आधुनिक ऑडिटोरियम भी है, जहां विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। ऑडिटोरियम में स्टेप स्लैब का काम प्रगति पर है और ब्रिकवर्क पूरा हो चुका है। साथ ही पूरे परिसर में आर्किटेक्चरल व स्ट्रक्चरल कार्य, विद्युत और आंतरिक जल आपूर्ति की व्यवस्था की जा रही है। बाउंड्री वॉल तैयार है। स्टोन वर्क कर्टेन क्लैडिंग, लैंडस्केपिंग, सेंट्रल इंफॉर्मेशन बोर्ड, मुख्य द्वार, गार्ड रूम, इंटरलॉकिंग रोड, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, सेप्टिक टैंक, सोकपिट और अंडरग्राउंड टैंक विकसित किए जा रहे हैं। मेटल सिल्हौटी और पंप कक्ष भी बनाए जा रहे हैं।
इस पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि श्रृंगवेरपुर केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं है, बल्कि त्याग, समर्पण और सामाजिक समरसता की अमर प्रतीक भूमि है। यह वह पावन धरा है जहां भगवान श्रीराम और निषादराज गुह्य का मिलन हुआ, जिसने भारतीय संस्कृति में समानता, आत्मीयता और सच्ची मित्रता का अद्भुत संदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रामराज्य की परिकल्पना के अनुरूप इस दिव्य प्रसंग को आधुनिक स्वरूप में जीवंत किया जा रहा है, ताकि नई पीढ़ियां न केवल इस गौरवशाली इतिहास को जानें, बल्कि रामराज्य की मूल भावना न्याय, समरसता और सर्वहित को भी गहराई से समझ सकें। इसी भावना को सशक्त रूप देने के लिए निषादराज सांस्कृतिक केंद्र का निर्माण कराया जा रहा है, जो निषाद समाज के स्वाभिमान और गौरव को नई पहचान देगा।
प्रयागराज से लखनऊ रोड पर लगभग 45 किमी दूर स्थित श्रृंगवेरपुर को रामायण में निषादराज की राजधानी बताया गया है। यहां उत्खनन में श्रृंगी ऋषि का मंदिर मिला, जिनके नाम पर नगर का नाम पड़ा। यहीं भगवान राम ने एक रात विश्राम किया था। मांझी के मना करने पर निषादराज ने चरण धोने की अनुमति लेकर गंगा जल से चरण धोए और उसे ग्रहण कर श्रद्धा प्रकट की। यह स्थान आज भी आस्था का केंद्र है। यह विकास श्रृंगवेरपुर को आस्था, संस्कृति और पर्यटन का प्रमुख केंद्र बनाएगा।

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