लखनऊ :

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने जन भवन प्रांगण, लखनऊ में 06 से 09 फरवरी, 2026 तक आयोजित 57वीं प्रादेशिक फल, शाकभाजी एवं पुष्प प्रदर्शनी-2026 के समापन अवसर पर आज प्रदर्शनी के विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कृत कर सम्मानित किया।
इस अवसर पर अपने संबोधन में राज्यपाल जी ने कहा कि प्रदर्शनी में विभिन्न विभागों, विशेषकर भारतीय सेना द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी, को आमजन से अत्यधिक सराहना मिली। उन्होंने सेना की प्रदर्शनी को विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र बताते हुए इसके लिए कर्नल दीपक कुमार एवं उनकी टीम की प्रशंसा की।
राज्यपाल जी ने कहा कि यह प्रदर्शनी विगत वर्षों में निरंतर विकसित होती रही है। प्रारंभ में प्रदर्शनी जहाँ केवल फल, फूल एवं गमलों तक सीमित थी, वहीं अब इसमें बच्चों, युवाओं और परिवारों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है।
जन भवन में विभिन्न प्रतिभागियों द्वारा निर्मित कलात्मक वस्तुओं की सराहना करते हुए राज्यपाल महोदया ने कहा कि कला हर व्यक्ति के भीतर होती है, आवश्यकता केवल उसे प्रदर्शित करने के अवसर प्रदान करने की होती है। उन्होंने कहा कि कलात्मक वस्तुओं का निर्माण किया जाना चाहिए, जिससे रचनात्मकता को बढ़ावा मिले। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि हमारे भीतर निहित कला को पहचानकर उसे बाहर लाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए।
उन्होंने बच्चों के पोषण पर बल देते हुए कहा कि उनके समुचित शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए घरों में सब्जियों को आहार का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने प्रदर्शनी में प्रदर्शित कलात्मक मॉडलों की सराहना करते हुए कहा कि रामायण, श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने, राष्ट्रध्वज तिरंगे के इतिहास जैसे विषयों पर आधारित मॉडलों ने भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा एवं ऐतिहासिक चेतना को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया। राज्यपाल जी ने कारागार विभाग सहित सभी प्रतिभागियों से भविष्य में और अधिक नवाचारपूर्ण मॉडलों के निर्माण का आह्वान किया।
राज्यपाल जी ने बताया कि इस वर्ष प्रदर्शनी को लगभग 3.5 लाख से अधिक दर्शकों ने प्रत्यक्ष रूप से देखा, वहीं सोशल मीडिया के माध्यम से यह आयोजन लाखों लोगों तक पहुँचा। प्रदर्शनी के दौरान लगभग 40 लाख रुपये से अधिक की बिक्री दर्ज की गई, जो किसानों और उत्पादकों के लिए उत्साहवर्धक है।
उन्होंने रूफटॉप सब्जी एवं बागवानी को पर्यावरण संरक्षण व स्वास्थ्य का प्रभावी माध्यम बताते हुए महिलाओं से इसमें विशेष रूप से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने सभी से अपने घरों में फल, फूल और सब्ज़ियों के पौधे लगाने की अपील की। उन्होंने कहा कि घर की छत पर भी फूल और सब्ज़ियां उगाई जा सकती हैं।
जन भवन स्थित गौशाला का उल्लेख करते हुए राज्यपाल महोदया ने बताया कि यहां लगभग 40 गायें हैं। उन्होंने बताया कि जन भवन में आयोजित पशुपालन पखवाड़े में जन भवन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा गायों को रोटी और गुड़ खिलाया गया, जिससे दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हुई और इस पखवाड़े को 15 दिनों के लिए और विस्तारित किया गया है।
राज्यपाल जी ने कहा कि उनसे मिलने आने वाले अनेक लोग उपहार स्वरूप फूलों के गुलदस्ते लाते हैं, किंतु वे उनसे आग्रह करती हैं कि गायों को रोटी एवं गुड़ खिलाने हेतु आटा और गुड़ लेकर आएं। भारतीय परंपरा का स्मरण कराते हुए उन्होंने कहा कि पहले घर में बिना गाय को रोटी खिलाए भोजन नहीं किया जाता था और इस परंपरा को आगे बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।
राज्यपाल जी ने किसानों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनके परिश्रम से ही समाज को पोषण मिलता है। किसानों को परिश्रमी बताते हुए उन्होंने कहा कि किसान कृषि उत्पादन करता है और यदि किसान न हो तो हमें भोजन प्राप्त नहीं हो सकता। उन्होंने किसानों के योगदान को समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
प्रदर्शनी में किसानों की स्वास्थ्य जांच, कैंसर जांच एवं दंत परीक्षण जैसी सुविधाओं को भी उन्होंने जनकल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
राज्यपाल महोदया ने कहा कि जन भवन का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने आगामी आम के मौसम का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां स्टॉल लगाकर आम की बिक्री भी की जा सकती है। इस अवसर पर उन्होंने गुजरात के अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब जन भवन में इतनी सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं तो उनका उपयोग जनता के हित में अवश्य किया जाना चाहिए।
राज्यपाल जी ने आयोजन से जुड़े सभी विभागों, अधिकारियों, कर्मचारियों, प्रतिभागियों, किसानों तथा आगंतुकों को बधाई देते हुए कहा कि जन भवन परिसर का उपयोग भविष्य में भी आम जनता, स्वयं सहायता समूहों, किसानों एवं महिलाओं के उत्पादों के विपणन हेतु किया जाना चाहिए।
उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से मिलेट्स को बढ़ावा मिला है। जन भवन में भी महिलाओं द्वारा मिलेट्स से बने विभिन्न उत्पादों की प्रतियोगिता की जाती है।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस प्रकार के आयोजन आगामी वर्षों में और अधिक व्यापक होगें तथा समाज, पर्यावरण और संस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कार्यक्रम के सफल संचालन में उद्यान विभाग व जन भवन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के परिश्रम की सराहना की। साथ ही, आज के पुरस्कार वितरण समारोह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले निर्णायकों (जज) की भूमिका की भी उन्होंने प्रशंसा की।
इस अवसर पर उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि प्रादेशिक फल, शाकभाजी एवं पुष्प प्रदर्शनी-2026 में फल, फूल एवं सब्जियों की कलात्मक आकृतियों के साथ भारतीय सेना के शौर्य का प्रदर्शन प्रदेशवासियों के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी में जीवन में फल, सब्जी और फूलों के महत्व को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया है। बच्चों द्वारा फूलों से सजाई गई मनमोहक कृतियाँ विशेष आकर्षण हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी उद्यान विभाग के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगी तथा विभाग को औद्यानिक विकास एवं कृषकों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने की दिशा में और अधिक सक्रियता से कार्य करना चाहिए।
प्रदर्शनी में कुल 155 स्टाल लगाए गए, जो रचनात्मक परिश्रम, नवाचार एवं आत्मनिर्भरता के सशक्त प्रतीक बने। प्रदर्शनी हेतु 04 दिवस में कुल लगभग 46 हजार से अधिक टिकटों की बिक्री हुई, जिससे लगभग 9 लाख से अधिक की आय सृजित हुई।
प्रदर्शनी के अंतर्गत आयोजित चिकित्सा शिविर में लगभग 1400 लोगों का पंजीकरण किया गया। इस शिविर के माध्यम से आमजन को कैंसर, डेंटल तथा टीबी जैसी गंभीर बीमारियों की जांच एवं उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई गई, जिसका बड़ी संख्या में लोगों ने लाभ उठाया।
प्रदर्शनी के अंतर्गत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं हेतु कुल 7771 प्रविष्टियों का पंजीकरण किया गया।
प्रतियोगिताओं के निष्पक्ष एवं पारदर्शी मूल्यांकन उपरांत कुल 1719 विजेताओं का चयन किया गया। इस वर्ष प्रदर्शनी में कुल 1690 प्रतिभागियों द्वारा प्रतिभाग किया। प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत रचनात्मकता, नवाचार एवं गुणवत्ता ने निर्णायक मंडल को विशेष रूप से प्रभावित किया।
इस प्रदर्शनी में जन भवन, मुख्यमंत्री आवास, मा० उच्च न्यायालय लखनऊ, पी०ए०सी०, कारागार, सेना, सीमैप, रेलवे, आई०आर०आई०टी०एम०, उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद, नगर निगम, लखनऊ विकास प्रधिकरण, मण्डी परिषद, मेट्रो तथा विभिन्न शैक्षिक संस्थानों व विश्वविद्यालयों आदि ने मुख्य रूप से प्रतिभाग किया गया। इसके अतिरिक्त महिलाओं, बच्चों एवं मालियों के लिए विभिन्न वर्गों में प्रतिभागिता आयोजित की गई।
इस वर्ष प्रथम बार कुल 23 वर्गों में सर्वाधिक अंक विजेता प्रतिभागी कमशः श्री ओम यादव, श्री अमन मौर्या, श्रीमती रीना सिंह, हसरत अली, रमा करोलिया, विश्वनरायण श्रीवास्तव, लालू गौतम, ओम प्रकाश मौर्या, राजकुमार चौरसिया, जयकरन, सचिन कुमार गुप्ता, सचिव एल०डी०ए०, निदेशक सीमैप, रंजन प्रकाश ठाकुर, पुलिस महानिदेशक, वरिष्ठ रजिस्ट्रार, मा० उच्च न्यायालय, अधीक्षक जिला कारागार, गौतम बुद्धनगर, रंगोली जन शिक्षण संस्थान, अजय सिंह रायबरेली, अधीक्षक, जन भवन को एक-एक चल वैजयन्ती व रु. 5100 का नकद पुरस्कार दिया गया।
साथ ही प्राकृतिक फूलो से निर्मित आकृतियों में राजकीय विश्वविद्यालयों में छत्रपति शाहू जी महराज को श्रीकृष्ण जी के अधरों पर सुशोभित बांसुरी, के लिये प्रथम तथा ए०के०टी०यू द्वारा प्रदर्शित ब्रह्मोस मिसाइल व लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा निर्मित श्री राम दरबार को द्वितीय पुरस्कार, निजी विश्वविद्यालयों में एरा विश्वविद्यालय द्वारा निर्मित सारस पक्षी जोड़ा को प्रथम, कृषि तथा पशु चिकित्सा विश्वविद्यालयों में पं०दीन दयाल उपाध्याय पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय मथुरा द्वारा निर्मित गोवर्धन पर्वत (चक्रधारी श्री कृष्ण जी की उंगली पर टिका हुआ गाय की थीम पर) को प्रथम व कृषि विश्वविद्यालय, बांदा को सुदर्शन चक व शंख की प्रतिकृति हेतु द्वितीय, राजकीय संस्थाओं में लखनऊ विकास प्रधिकरण को वंदे मातरम (150 वर्ष पूर्ण होने पर) बंकिम चंद्र चटर्जी / आनंदमठ, व उ०प्र०आवास विकास परिषद को आपरेशन सिंदूर की थीम पर आधारित सजावट कार्य, हेतु प्रथम, नगर निगम, लखनऊ को रूफ टाप गार्डिनिंग हेतु द्वितीय, राजकीय विभागों में समुद्री थीम पर समुद्री जीवो का प्रदर्शन, हेतु राजकीय उद्यान लखनऊ व जय जवान हेतु मुख्य सुरक्षा अधिकारी जन भवन को द्वितीय, उत्तर रेलवे को नंदी व शिवलिंग हेतु प्रथम पुरस्कार साथ ही रक्षा उपकरणें के प्रदर्शन हेतु सेना को विशिष्ट पुरस्कार प्रदान किया गया। इसी कम में प्रदर्शनी के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्श भाग-1 क्लास-2 के वर्ग 29 में 6-हालीहाक (गमलों में जाड़े के मौसमी फूलों के पौध) के प्रदर्शन हेतु अधीक्षक जन भवन को रू0 5100/- का नगद पुरस्कार प्रदान किया गया।
क्विज, लेटर राइटिंग एवं स्टाम्प डिजाइन प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने वाले स्कूली बच्चों में क्विज प्रतियोगिता में प्रथम स्थान लोरेटो कान्वेंट इंटरमीडिएट कॉलेज, लखनऊ की मदीहा जावेद ने, द्वितीय स्थान बाल विद्या मंदिर सी.से. स्कूल, चारबाग, लखनऊ के मृत्युंजय मौर्य ने तथा तृतीय स्थान बाल विद्या मंदिर सी.से. स्कूल, चारबाग, लखनऊ की प्रियंशी सिंह ने प्राप्त किया। लेटर राइटिंग प्रतियोगिता में प्रथम स्थान बाल विद्या मंदिर सी.से. स्कूल, चारबाग, लखनऊ की दिव्यांशी व्यास ने, द्वितीय स्थान सिटी इंटरनेशनल स्कूल, बालागंज, लखनऊ की अंशिका ने तथा तृतीय स्थान लोरेटो कान्वेंट इंटरमीडिएट कॉलेज, लखनऊ की सुमेधा चंदेल ने तथा प्राप्त किया। वहीं स्टाम्प डिजाइन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान बाल विद्या मंदिर सी.से. स्कूल, चारबाग, लखनऊ की तनिष्का ने, द्वितीय स्थान बाल विद्या मंदिर सी.से. स्कूल, चारबाग, लखनऊ की आयुषी सिंह ने तथा तृतीय स्थान नवयुग रेडियंस सी.से. स्कूल, राजेन्द्र नगर, लखनऊ की आलिया वारसी ने प्राप्त किया।
इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश श्री राजीव कृष्णा, विशेष कार्याधिकारी (अपर मुख्य सचिव स्तर) डॉ. सुधीर महादेव बोबडे, अपर मुख्य सचिव, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग श्री बी.एल. मीणा सहित जनभवन एवं उद्यान विभाग के अधिकारी व कर्मचारीगण, प्रतिभागीगण तथा कृषक बंधु उपस्थित रहे।

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने जन भवन प्रांगण, लखनऊ में 06 से 09 फरवरी, 2026 तक आयोजित 57वीं प्रादेशिक फल, शाकभाजी एवं पुष्प प्रदर्शनी-2026 के समापन अवसर पर आज प्रदर्शनी के विजयी प्रतिभागियों को पुरस्कृत कर सम्मानित किया।इस अवसर पर अपने संबोधन में राज्यपाल जी ने कहा कि प्रदर्शनी में विभिन्न विभागों, विशेषकर भारतीय सेना द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी, को आमजन से अत्यधिक सराहना मिली। उन्होंने सेना की प्रदर्शनी को विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र बताते हुए इसके लिए कर्नल दीपक कुमार एवं उनकी टीम की प्रशंसा की।
राज्यपाल जी ने कहा कि यह प्रदर्शनी विगत वर्षों में निरंतर विकसित होती रही है। प्रारंभ में प्रदर्शनी जहाँ केवल फल, फूल एवं गमलों तक सीमित थी, वहीं अब इसमें बच्चों, युवाओं और परिवारों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है।
जन भवन में विभिन्न प्रतिभागियों द्वारा निर्मित कलात्मक वस्तुओं की सराहना करते हुए राज्यपाल महोदया ने कहा कि कला हर व्यक्ति के भीतर होती है, आवश्यकता केवल उसे प्रदर्शित करने के अवसर प्रदान करने की होती है। उन्होंने कहा कि कलात्मक वस्तुओं का निर्माण किया जाना चाहिए, जिससे रचनात्मकता को बढ़ावा मिले। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि हमारे भीतर निहित कला को पहचानकर उसे बाहर लाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए।
उन्होंने बच्चों के पोषण पर बल देते हुए कहा कि उनके समुचित शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए घरों में सब्जियों को आहार का अनिवार्य हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने प्रदर्शनी में प्रदर्शित कलात्मक मॉडलों की सराहना करते हुए कहा कि रामायण, श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने, राष्ट्रध्वज तिरंगे के इतिहास जैसे विषयों पर आधारित मॉडलों ने भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा एवं ऐतिहासिक चेतना को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया। राज्यपाल जी ने कारागार विभाग सहित सभी प्रतिभागियों से भविष्य में और अधिक नवाचारपूर्ण मॉडलों के निर्माण का आह्वान किया।
राज्यपाल जी ने बताया कि इस वर्ष प्रदर्शनी को लगभग 3.5 लाख से अधिक दर्शकों ने प्रत्यक्ष रूप से देखा, वहीं सोशल मीडिया के माध्यम से यह आयोजन लाखों लोगों तक पहुँचा। प्रदर्शनी के दौरान लगभग 40 लाख रुपये से अधिक की बिक्री दर्ज की गई, जो किसानों और उत्पादकों के लिए उत्साहवर्धक है।
उन्होंने रूफटॉप सब्जी एवं बागवानी को पर्यावरण संरक्षण व स्वास्थ्य का प्रभावी माध्यम बताते हुए महिलाओं से इसमें विशेष रूप से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने सभी से अपने घरों में फल, फूल और सब्ज़ियों के पौधे लगाने की अपील की। उन्होंने कहा कि घर की छत पर भी फूल और सब्ज़ियां उगाई जा सकती हैं।
जन भवन स्थित गौशाला का उल्लेख करते हुए राज्यपाल महोदया ने बताया कि यहां लगभग 40 गायें हैं। उन्होंने बताया कि जन भवन में आयोजित पशुपालन पखवाड़े में जन भवन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा गायों को रोटी और गुड़ खिलाया गया, जिससे दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हुई और इस पखवाड़े को 15 दिनों के लिए और विस्तारित किया गया है।
राज्यपाल जी ने कहा कि उनसे मिलने आने वाले अनेक लोग उपहार स्वरूप फूलों के गुलदस्ते लाते हैं, किंतु वे उनसे आग्रह करती हैं कि गायों को रोटी एवं गुड़ खिलाने हेतु आटा और गुड़ लेकर आएं। भारतीय परंपरा का स्मरण कराते हुए उन्होंने कहा कि पहले घर में बिना गाय को रोटी खिलाए भोजन नहीं किया जाता था और इस परंपरा को आगे बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।
राज्यपाल जी ने किसानों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनके परिश्रम से ही समाज को पोषण मिलता है। किसानों को परिश्रमी बताते हुए उन्होंने कहा कि किसान कृषि उत्पादन करता है और यदि किसान न हो तो हमें भोजन प्राप्त नहीं हो सकता। उन्होंने किसानों के योगदान को समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
प्रदर्शनी में किसानों की स्वास्थ्य जांच, कैंसर जांच एवं दंत परीक्षण जैसी सुविधाओं को भी उन्होंने जनकल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
राज्यपाल महोदया ने कहा कि जन भवन का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने आगामी आम के मौसम का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां स्टॉल लगाकर आम की बिक्री भी की जा सकती है। इस अवसर पर उन्होंने गुजरात के अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि जब जन भवन में इतनी सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं तो उनका उपयोग जनता के हित में अवश्य किया जाना चाहिए।
राज्यपाल जी ने आयोजन से जुड़े सभी विभागों, अधिकारियों, कर्मचारियों, प्रतिभागियों, किसानों तथा आगंतुकों को बधाई देते हुए कहा कि जन भवन परिसर का उपयोग भविष्य में भी आम जनता, स्वयं सहायता समूहों, किसानों एवं महिलाओं के उत्पादों के विपणन हेतु किया जाना चाहिए।
उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से मिलेट्स को बढ़ावा मिला है। जन भवन में भी महिलाओं द्वारा मिलेट्स से बने विभिन्न उत्पादों की प्रतियोगिता की जाती है।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस प्रकार के आयोजन आगामी वर्षों में और अधिक व्यापक होगें तथा समाज, पर्यावरण और संस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कार्यक्रम के सफल संचालन में उद्यान विभाग व जन भवन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के परिश्रम की सराहना की। साथ ही, आज के पुरस्कार वितरण समारोह में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले निर्णायकों (जज) की भूमिका की भी उन्होंने प्रशंसा की।
इस अवसर पर उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि प्रादेशिक फल, शाकभाजी एवं पुष्प प्रदर्शनी-2026 में फल, फूल एवं सब्जियों की कलात्मक आकृतियों के साथ भारतीय सेना के शौर्य का प्रदर्शन प्रदेशवासियों के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनी में जीवन में फल, सब्जी और फूलों के महत्व को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया गया है। बच्चों द्वारा फूलों से सजाई गई मनमोहक कृतियाँ विशेष आकर्षण हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शनी उद्यान विभाग के लिए मील का पत्थर सिद्ध होगी तथा विभाग को औद्यानिक विकास एवं कृषकों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने की दिशा में और अधिक सक्रियता से कार्य करना चाहिए।
प्रदर्शनी में कुल 155 स्टाल लगाए गए, जो रचनात्मक परिश्रम, नवाचार एवं आत्मनिर्भरता के सशक्त प्रतीक बने। प्रदर्शनी हेतु 04 दिवस में कुल लगभग 46 हजार से अधिक टिकटों की बिक्री हुई, जिससे लगभग 9 लाख से अधिक की आय सृजित हुई।
प्रदर्शनी के अंतर्गत आयोजित चिकित्सा शिविर में लगभग 1400 लोगों का पंजीकरण किया गया। इस शिविर के माध्यम से आमजन को कैंसर, डेंटल तथा टीबी जैसी गंभीर बीमारियों की जांच एवं उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई गई, जिसका बड़ी संख्या में लोगों ने लाभ उठाया।
प्रदर्शनी के अंतर्गत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं हेतु कुल 7771 प्रविष्टियों का पंजीकरण किया गया।
प्रतियोगिताओं के निष्पक्ष एवं पारदर्शी मूल्यांकन उपरांत कुल 1719 विजेताओं का चयन किया गया। इस वर्ष प्रदर्शनी में कुल 1690 प्रतिभागियों द्वारा प्रतिभाग किया। प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत रचनात्मकता, नवाचार एवं गुणवत्ता ने निर्णायक मंडल को विशेष रूप से प्रभावित किया।
इस प्रदर्शनी में जन भवन, मुख्यमंत्री आवास, मा० उच्च न्यायालय लखनऊ, पी०ए०सी०, कारागार, सेना, सीमैप, रेलवे, आई०आर०आई०टी०एम०, उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद, नगर निगम, लखनऊ विकास प्रधिकरण, मण्डी परिषद, मेट्रो तथा विभिन्न शैक्षिक संस्थानों व विश्वविद्यालयों आदि ने मुख्य रूप से प्रतिभाग किया गया। इसके अतिरिक्त महिलाओं, बच्चों एवं मालियों के लिए विभिन्न वर्गों में प्रतिभागिता आयोजित की गई।
इस वर्ष प्रथम बार कुल 23 वर्गों में सर्वाधिक अंक विजेता प्रतिभागी कमशः श्री ओम यादव, श्री अमन मौर्या, श्रीमती रीना सिंह, हसरत अली, रमा करोलिया, विश्वनरायण श्रीवास्तव, लालू गौतम, ओम प्रकाश मौर्या, राजकुमार चौरसिया, जयकरन, सचिन कुमार गुप्ता, सचिव एल०डी०ए०, निदेशक सीमैप, रंजन प्रकाश ठाकुर, पुलिस महानिदेशक, वरिष्ठ रजिस्ट्रार, मा० उच्च न्यायालय, अधीक्षक जिला कारागार, गौतम बुद्धनगर, रंगोली जन शिक्षण संस्थान, अजय सिंह रायबरेली, अधीक्षक, जन भवन को एक-एक चल वैजयन्ती व रु. 5100 का नकद पुरस्कार दिया गया।
साथ ही प्राकृतिक फूलो से निर्मित आकृतियों में राजकीय विश्वविद्यालयों में छत्रपति शाहू जी महराज को श्रीकृष्ण जी के अधरों पर सुशोभित बांसुरी, के लिये प्रथम तथा ए०के०टी०यू द्वारा प्रदर्शित ब्रह्मोस मिसाइल व लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा निर्मित श्री राम दरबार को द्वितीय पुरस्कार, निजी विश्वविद्यालयों में एरा विश्वविद्यालय द्वारा निर्मित सारस पक्षी जोड़ा को प्रथम, कृषि तथा पशु चिकित्सा विश्वविद्यालयों में पं०दीन दयाल उपाध्याय पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय मथुरा द्वारा निर्मित गोवर्धन पर्वत (चक्रधारी श्री कृष्ण जी की उंगली पर टिका हुआ गाय की थीम पर) को प्रथम व कृषि विश्वविद्यालय, बांदा को सुदर्शन चक व शंख की प्रतिकृति हेतु द्वितीय, राजकीय संस्थाओं में लखनऊ विकास प्रधिकरण को वंदे मातरम (150 वर्ष पूर्ण होने पर) बंकिम चंद्र चटर्जी / आनंदमठ, व उ०प्र०आवास विकास परिषद को आपरेशन सिंदूर की थीम पर आधारित सजावट कार्य, हेतु प्रथम, नगर निगम, लखनऊ को रूफ टाप गार्डिनिंग हेतु द्वितीय, राजकीय विभागों में समुद्री थीम पर समुद्री जीवो का प्रदर्शन, हेतु राजकीय उद्यान लखनऊ व जय जवान हेतु मुख्य सुरक्षा अधिकारी जन भवन को द्वितीय, उत्तर रेलवे को नंदी व शिवलिंग हेतु प्रथम पुरस्कार साथ ही रक्षा उपकरणें के प्रदर्शन हेतु सेना को विशिष्ट पुरस्कार प्रदान किया गया। इसी कम में प्रदर्शनी के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्श भाग-1 क्लास-2 के वर्ग 29 में 6-हालीहाक (गमलों में जाड़े के मौसमी फूलों के पौध) के प्रदर्शन हेतु अधीक्षक जन भवन को रू0 5100/- का नगद पुरस्कार प्रदान किया गया।
क्विज, लेटर राइटिंग एवं स्टाम्प डिजाइन प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने वाले स्कूली बच्चों में क्विज प्रतियोगिता में प्रथम स्थान लोरेटो कान्वेंट इंटरमीडिएट कॉलेज, लखनऊ की मदीहा जावेद ने, द्वितीय स्थान बाल विद्या मंदिर सी.से. स्कूल, चारबाग, लखनऊ के मृत्युंजय मौर्य ने तथा तृतीय स्थान बाल विद्या मंदिर सी.से. स्कूल, चारबाग, लखनऊ की प्रियंशी सिंह ने प्राप्त किया। लेटर राइटिंग प्रतियोगिता में प्रथम स्थान बाल विद्या मंदिर सी.से. स्कूल, चारबाग, लखनऊ की दिव्यांशी व्यास ने, द्वितीय स्थान सिटी इंटरनेशनल स्कूल, बालागंज, लखनऊ की अंशिका ने तथा तृतीय स्थान लोरेटो कान्वेंट इंटरमीडिएट कॉलेज, लखनऊ की सुमेधा चंदेल ने तथा प्राप्त किया। वहीं स्टाम्प डिजाइन प्रतियोगिता में प्रथम स्थान बाल विद्या मंदिर सी.से. स्कूल, चारबाग, लखनऊ की तनिष्का ने, द्वितीय स्थान बाल विद्या मंदिर सी.से. स्कूल, चारबाग, लखनऊ की आयुषी सिंह ने तथा तृतीय स्थान नवयुग रेडियंस सी.से. स्कूल, राजेन्द्र नगर, लखनऊ की आलिया वारसी ने प्राप्त किया।
इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश श्री राजीव कृष्णा, विशेष कार्याधिकारी (अपर मुख्य सचिव स्तर) डॉ. सुधीर महादेव बोबडे, अपर मुख्य सचिव, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग श्री बी.एल. मीणा सहित जनभवन एवं उद्यान विभाग के अधिकारी व कर्मचारीगण, प्रतिभागीगण तथा कृषक बंधु उपस्थित रहे।
