हमीरपुर/मुस्करा। विकासखंड मुस्करा जनपद हमीरपुर के ग्राम बिहुनी खुर्द में अखंड आश्रम में गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का कार्यक्रम चल रहा है।
कथा के छठवें दिवस पर विद्वान एवं सुप्रसिद्ध कथा व्यास नैमिषारण्य अखाड़ा निरंजनी के आचार्य महंत स्वामी वीरेंद्र आनंदपुरी द्वारा इस कथा के माध्यम से वर्तमान में समाज एवं परिवार सुधार के महत्वपूर्ण उपदेश दिए गये।
कथा व्यास श्री व्यास जी ने बताया कि हम मनुष्य हैं मनुष्यता के छह लक्षण होते हैं। यश विद्या तप दान ज्ञान और शील जिस मनुष्य में यह लक्षण नहीं है। वह पृथ्वी पर एक भार है।
हम डॉक्टर मास्टर या वकील या नेता बाद में हैं, हमारे अंदर मनुष्यता पहले होनी चाहिए। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि हम जातियों में न बटे। वसुदेव कुटुंबकम हमारा उद्देश्य होना चाहिए। आज की राजनीति से प्रेरित होकर हम जातियों में जो बट रहे हैं, यह गलत है। भविष्य की पीढ़ियों के लिए अच्छा नहीं है।
सनातन धर्म के विषय में उन्होंने कहा की सनातन का मुख्य सार कंकर को शंकर और हर वृक्ष डाली पत्ते को ईश्वर देखता है कुत्ते से लगाकर ब्रह्म तक सभी में समभाव देखता है।
सनातन की असली व्याख्या और पहचान के संबंध में उन्होंने कहा कि हम किसी भी राग द्वेष, झगड़ा, ऊंच नीच और भेदभाव को मिटाकर गांव में आखिरी व्यक्ति के बराबर हो जाएं सबको बराबर देखें यही सनातन की असली पहचान है यदि हम उच्च नीच व जातियों में बटे तो बांग्लादेश और नेपाल की तरह हमारा भी हस्व हो सकता है कथा व्यास जी के शिष्य श्री जगदीश चचौंदिया प्रबंधक संस्कृत विद्यालय द्वारा उनका प्रारंभ में पूजन एवं स्वागत किया गया इस अवसर पर समस्त शिष्य गुरु भाई राजू मिश्रा आदि व गांव की जनता तथा परमात्मा नंद जूनियर हाई स्कूल विद्यालय के प्रबंधक हरस्वरूप व्यास सहित सभी शिक्षक गण उपस्थित रहे परीक्षित के रूप में बलदाऊ बुधौलिया कथा सुन रहे हैं।
