जो राजनेता-अधिकारी शाकाहारी, नाशमुक्त, चरित्रवान रहते हैं, वे अच्छा काम करते हैं – बाबा उमाकान्त जी महाराज

 

 

(बोईरदादर, रायगढ़): 11 जनवरी 2026 के सतसंग में बाबा उमाकान्त जी महाराज ने राजनेता और अधिकारियों को उनके दिल-दिमाग, बुद्धि को सही रखने और जनता का दिल जीतने का तरीका बताते हुए कहा कि दिल-दिमाग और बुद्धि, खून से चलती है। जिनका खून ही बेमेल हो गया, जिन्होंने शरीर में मांस, अण्डा, शराब जैसी गंदी चीजें डाल कर के खून को खराब कर दिया, उनका दिल-दिमाग, बुद्धि काम नहीं करते हैं।
लेकिन जो राजनेता-अधिकारी लोग शाकाहारी रहते हैं उनकी दिल-दिमाग, बुद्धि अलग रहती है, वे अच्छा काम करते हैं और तब उन्हें कोई उनके ओहदे यानि पद से नहीं हटा सकता है।

आगे बढ़ने के लिए गंदी चीजों को छोड़ कर के अच्छाई को अपना लेना चाहिए।

राजनीति में देखो! पच्चीस साल से बिहार के मुख्य मंत्री को कोई हटा ही नहीं पा रहा है, क्योंकि अच्छा काम किया उन्होंने; शराब बंदी कर दी। अच्छा काम करने वाले कई शाकाहारी हैं; मध्य प्रदेश में इससे पहले जो मुख्यमंत्री थे वे भी शाकाहारी, नशामुक्त हैं, इस समय पर जो मुख्य मंत्री हैं वे भी शाकाहारी, नशामुक्त हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री भी शाकाहारी हैं। उन्होंने कानून व्यवस्था को एकदम सही कर दिया। उनका भी दिल-दिमाग, बुद्धि शाकाहारी और नशामुक्त होने की वजह से यह सब है।
देश के प्रधानमंत्री, देखो! कितना काम कर रहे हैं, कितना नाम कमा रहे हैं, देश को ऊंचा उठाने में मदद कर रहे हैं। यह किसका फल है? शाकाहारी, नशामुक्त और चरित्रवान रहने का फल है। इसीलिए आप लोगों को शिक्षा लेनी चाहिए और आगे बढ़ने के लिए गंदी चीजों को छोड़ कर के अच्छाई को अपना लेना चाहिए।

कलयुग में ही सतयुग आएगा।

कलयुग में ही सतयुग आएगा। कलयुग, कलयुगी लोगों को छोड़ेगा नहीं; अकाल मृत्यु में बहुत लोग मरेंगे। इसीलिए कलयुगी विचारधारा के लोगों को समझाओ कि आप सतयुग ले आओ, सन्तमत की साधना कर के ब्रह्म में विचरण करने वाले बन जाओ। आप ब्रह्मचारी बन जाओ; ब्रह्मचारी रहने का मतलब होता है “एक नारी सदा ब्रह्मचारी” पुरुष, पराई स्त्री के साथ बुरा कर्म मत करो और स्त्री, पराए पुरुष के साथ बुरा कर्म मत करो।
हाथ जोड़कर विनय हमारी, तजो नशा बनो शाकाहारी।
छोड़ो व्यभिचार बनो ब्रह्मचारी, सतयुग लाने की करो तैयारी।।

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