मोतिहारी, पूर्वी चम्पारण, बिहार परम् सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज ने सतसंग में कहा कि आगे का समय खराब है। स्वार्थ में दोस्त ही दुश्मन हो जाएगा। जिस पर बहुत भरोसा है वही दुश्मन हो जाएगा। तो स्वार्थ की बदबू अगर किसी में आ रही हो तो उससे दूर हो जाओ।
लोभ और लालच बहुत बढ़ रहा है। जो लखपति हैं, वे कहते हैं कि हम करोड़पति हो जाएं। जो करोड़पति हैं, वे कहते हैं कि हम अरब खरबपति हो जाएं। और जो खरबपति हैं, वे कहते हैं कि कुबेर भगवान का खजाना हम ही को मिल जाए। लेकिन अब यह सब जो सोच रहे हैं, क्या उन्हें यह मालूम है कि माया तो स्वप्नवत है। माया तो आई और चली गई।
लक्ष्मी कमाई नहीं जाती है, वह तो आकर बैठ जाती है
लक्ष्मी कमाई नहीं जाती है, वह तो आकर बैठ जाती है। जब वह देखती है कि यह हमें अच्छे काम में लगा रहा है तब वह रुक जाती है और नहीं तो खिसक जाती है।
रुपया-पैसा, धन-दौलत को माया कहते हैं और यह उस जगदीश की है; ईश्वर की है। दुनिया में जितनी भी चीजें हैं सब उसी की हैं और इनको अगर कोई अपना कहे तो वह उसका सबसे बड़ा भ्रम और भूल है।
लेकिन हविश की जो यह नदी बहती चली जा रही है, यह विनाश करेगी। इसीलिए ज्यादा लालच मत करना, ठगी अभी बहुत बढ़ेगी। लालच में आकर नौकरी के लिए किसी को भी पैसा दे देते हो और वह सब चला जाता है।
