कहते हैं, मनुष्य की पहचान उसके विचारों से नहीं, उसकी संगति से होती है। जैसी संगति, वैसा ही जीवन का रंग। इसी सत्य को उजागर करती है यह प्रेरणादायक कहानी।
एक बगीचे में रहने वाला एक भंवरा प्रतिदिन फूलों पर मंडराता, सुगंध और परागरस का आनंद लेता था। उसी बगीचे के पास गोबर के ढेर में रहने वाला एक छोटा सा कीड़ा भी था। स्वभाव से सरल और निश्छल होने के कारण दोनों में मित्रता हो गई। एक दिन कीड़े ने भंवरे से कहा, “मित्र, तुम मेरे सबसे अच्छे दोस्त हो, आज मेरे घर भोजन करने आओ।” मित्रता निभाने के भाव से भंवरा उसके घर गया, पर वहाँ उसे गोबर के अतिरिक्त कुछ न मिला। भंवरा मन ही मन सोचने लगा कि बुरी जगह की संगति का परिणाम भी बुरा ही होता है।
कुछ दिनों बाद भंवरे ने कीड़े को अपने घर आने का निमंत्रण दिया। अगले दिन कीड़ा भंवरे के साथ फूलों से भरे बगीचे में पहुँचा। भंवरे ने उसे कोमल गुलाब के फूल के भीतर बैठा दिया। पहली बार कीड़े ने सुगंध, सौंदर्य और मीठे परागरस का स्वाद चखा। वह आनंदित होकर अपने मित्र को धन्यवाद दे ही रहा था कि तभी मंदिर का पुजारी आया और उसी गुलाब के फूल को तोड़कर भगवान के चरणों में अर्पित कर दिया। अनजाने में ही कीड़े को भगवान के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हो गया।
शाम को पूजा के बाद पुजारी ने सभी फूल गंगा जी में प्रवाहित कर दिए। इस प्रकार कीड़ा गंगा स्नान का पुण्य भी प्राप्त कर चुका था। वह अपने भाग्य पर आश्चर्य कर ही रहा था कि तभी भंवरा वहाँ पहुँचा और बोला, “मित्र, कैसी रही यात्रा?” कीड़े की आँखों में कृतज्ञता के आँसू थे। उसने कहा, “भाई, तुम्हारी संगति ने मुझे जन्म-जन्म के बंधनों से मुक्त कर दिया। आज समझ आया कि अच्छी संगति जीवन को कहाँ से कहाँ पहुँचा सकती है।”
यह कहानी हमें सिखाती है कि ईश्वर हमें जीवन में कुछ लोगों से विशेष उद्देश्य के लिए मिलाता है। सभी रिश्ते रक्त से नहीं बनते, कुछ रिश्ते आत्मा से जुड़ते हैं। सही संगति हमें उन्नति, पवित्रता और सच्चे मार्ग की ओर ले जाती है, जबकि गलत संगति हमारे गुणों का नाश कर देती है।
*शिक्षा:*
संगत से गुण उपजते हैं और संगत से ही नष्ट हो जाते हैं। इसलिए जीवन में सदैव सत्संग और अच्छे लोगों का साथ चुनें, क्योंकि वही हमें ऊँचाइयों तक पहुंचा सकता है !
राम कुमार दीक्षित, पत्रकार !
