स्वस्थ मिट्टी से ही सुरक्षित रहेगा धरती मां और जीवों का स्वास्थ्य-सूर्य प्रताप शाही

5 दिसंबर को आयोजित किए जाने वाले विश्व मृदा दिवस के अवसर पर प्रदेश के कृषि मंत्री  सूर्य प्रताप शाही ने किसानों से अपील की है कि वे अपने खेतों की मिट्टी का स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए नियमित रूप से मृदा जांच अवश्य कराएँ। उन्होंने कहा कि स्वस्थ मृदा मानव स्वास्थ्य, प्रकृति और पर्यावरण के लिए अत्यंत आवश्यक है। यह हमारे भोजन की गुणवत्ता निर्धारित करती है और पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मिट्टी की जांच से हमें पता चलता है कि कौन से पोषक तत्व आवश्यक हैं, जिससे किसान अंधाधुंध उर्वरक के प्रयोग से बच सकते हैं। मृदा स्वास्थ्य को बचाए रखने के लिए हमें संतुलित मात्रा में खाद और उर्वरकों का उपयोग करना चाहिए और फसल चक्र अपनाना चाहिए। यह सावधानियां भविष्य में न केवल उत्पादन की लागत को कम करेंगी बल्कि जमीन की उर्वरता को भी लंबे समय तक सुरक्षित रखेंगी, जिससे आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ और उपजाऊ भूमि मिल सकेगी।
विश्व मृदा दिवस के अवसर पर प्रदेश भर में मृदा स्वास्थ्य स्तर में सुधार लाने के विषय पर कृषक वैज्ञानिक संवाद एवं राज्य स्तरीय कृषक संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन के तहत मृदा के स्वास्थ्य स्तर विषय पर एक संगोष्ठी की जाएगी। साथ ही, फसलों में समेकित पोषक तत्वों के प्रयोग के महत्व विषय पर कृषकों से संवाद किया जाएगा, और मृदा उर्वरता स्तर बनाए रखने हेतु मॉडल विकसित कराए जाएंगे।
कार्यक्रम के दौरान, प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों तथा सम्बद्ध विद्यालयों के विद्यार्थियों द्वारा वर्तमान मृदा स्वास्थ्य की स्थिति तथा सुधार विषय पर प्रस्तुति की जाएगी। व्यापक जागरूकता के लिए, जनपद से सम्बन्धित समस्त कृषि विज्ञान केन्द्रों पर क्षेत्रीय कृषकों को आमंत्रित करके प्रशिक्षित एवं जागरूक कराया जाएगा। इसके अतिरिक्त, मृदा परीक्षण के सजीव प्रदर्शन हेतु विभिन्न स्टॉलों के माध्यम से भी जागरूकता कार्यक्रम कराया जाएगा।
इस कार्यक्रम के व्यापक आयोजन हेतु कृषि विभाग द्वारा प्रदेश भर के 89 कृषि विज्ञान केंद्रों, सभी कृषि विश्वविद्यालयों तथा कृषि प्रक्षेत्रों पर किसानों के साथ संवाद स्थापित करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किया जा रहे हैं। कृषि निदेशालय, लखनऊ के ऑडोटोरियम में मृदा स्वास्थ्य एवं प्रबंधन विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। समस्त कृषि विश्वविद्यालयों एवं सम्बद्ध कृषि विज्ञान केन्द्रों पर कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। समस्त राजकीय कृषि प्रक्षेत्रों पर अपर कृषि निदेशक (बीज एवं प्रक्षेत्र) के माध्यम से कार्यक्रम के आयोजन हेतु समस्त जिला कृषि अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। इसके अलावा, समस्त जनपदों पर उप कृषि निदेशक एवं जनपदीय मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं के माध्यम से भी कार्यक्रम आयोजन हेतु निर्देशित किया गया है। विभिन्न संस्थानों के निदेशकगणों को कार्यक्रम में सम्मिलित होने तथा अपने संस्थानों पर भी कार्यक्रम आयोजित कराने के निर्देश दिए गए हैं।

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