पूर्व मुख्यमंत्री  अखिलेश यादव ने बीएलओ विजय वर्मा के परिवार से भेंट की और उन्हें 2 लाख रूपये की आर्थिक मदद दी

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री  अखिलेश यादव ने आज समाजवादी पार्टी के राज्य मुख्यालय, लखनऊ में एसआईआर गणना में अधिकारियों के दबाव से परेशान होकर जान गंवाने वाले बीएलओ विजय वर्मा के परिवार से भेंट की और उन्हें 2 लाख रूपये की आर्थिक मदद दी। उन्होंने सरकार से मृतक के परिवार को 1 करोड़ रूपये की आर्थिक सहायता और एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दिए जाने की भी मांग की। इस अवसर पर जिलाध्यक्ष जय सिंह जयंत थे।
अखिलेश यादव के सामने मृतक विजय वर्मा की पत्नी संगीता फूट-फूट कर रोने लगी। उनके साथ उनका 20 वर्षीय बेटा हर्षित भी था। विजय वर्मा प्रा0वि0 सरांवा, मलिहाबाद लखनऊ में शिक्षामित्र थे और उनकी ड्यूटी बीएलओ के तौर पर बूथ नं0 181 टिकरी खुर्द पर थी। 21 नवम्बर 2025 को उनकी मृत्यु हुई।
संगीता ने बताया कि उनके पति विजय वर्मा को दिन के अलावा देर रात तक काम करना पड़ता था। अधिकारी काम पूरा न होने पर एफआईआर कराने की धमकी देते थे। 14 नवम्बर 2025 की रात भी वे काम कर रहे थे जब 12 बजे रात में उन्हें ब्रेन स्ट्रोक पड़ा। चरक अस्पताल में इलाज के दौरान 21 नवम्बर 2025 को रात 08ः00 बजे उनका निधन हो गया। उन्होंने बताया कि अधिकारी दिन में 200 फार्म भरने को कहते थे। जल्दी काम पूरा न होने पर एफआईआर कराने की धमकी देते थे। इससे वे बहुत परेशान थे। अब डीएम साहब कहते है कि विजय वर्मा को बीमारी की वजह से पहले ही रिलीव कर दिया गया था। स्कूल पर भी ऐसा ही दबाव डाला जा रहा है। मृतक की पत्नी श्रीमती संगीता ने बताया कि उन्हें कोई सरकारी मदद नहीं मिली। न कोई सहानुभूति जताने आया।
अखिलेश यादव ने मीडिया से वार्ता में कहा कि एसआईआर का काम सावधानी का और जिम्मेदारी का है। इसमें इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है? भाजपा और चुनाव आयोग मिले हुए है। बीएलओ की मदद के लिए बतौर सहायक नगर पालिका के सफाई कर्मचारी रखे जा रहे है। बहुत जगह फार्म नहीं बंटे। संविधान के तहत जो अधिकार और आरक्षण मिला है उसे छीनने की तैयारी है।
यादव ने कहा कि अधिकारियों पर दबाव बनाया जा रहा है कि जिनकी मौत हो जाए उन्हें ड्यूटी पर न दिखाया जाए। बिना टेªनिंग के एसआईआर की प्रक्रिया का काम कराया जा रहा है।
अखिलेश यादव ने बताया कि कल रात फतेहपुर में आत्महत्या करने वाले बीएलओ के परिवार से वे मिले। उनके परिजन बता रहे थे कि उनके ऊपर लगातार दबाव बनाया जा रहा था। पश्चिम बंगाल के लोग कह रहे हैं कि चुनाव आयोग के हाथ खून से रंग गए है। इनकी मदद कौन करेगा, जिनकी जान गई है।

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