गांवों में निर्मित अमृत सरोवरों पर मनाया गया संविधान दिवस

उपमुख्यमंत्री  केशव प्रसाद मौर्य के निर्देशो के क्रम मे प्रदेश की ग्राम पंचायतों में मनरेगा योजनातंर्गत बने अमृत सरोवर स्थलों पर संविधान दिवस को उत्साहपूर्वक मनाया गया। 26 नवंबर को संविधान दिवस के अवसर पर गांवों में बने अमृत सरोवर स्थलों पर भारत रत्न बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर को नमन कर सामूहिक रूप से संविधान की उद्देशिका का सशपथ पाठन किया गया। जानकारी दें कि प्रदेश भर में मनरेगा योजना के अंतर्गत मिशन अमृत सरोवर योजना के प्रथम चरण में ग्राम पंचायतों में अब तक 19 हजार से ज्यादा अमृत सरोवर बनाये जा चुके हैं, और इन अमृत सरोवर पर संविधान दिवस मनाने के निर्देश निर्गत किये गये थे। इस संबंध में ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा दिये गये निर्देश के क्रम में आयुक्त, ग्राम्य विकास, उ0प्र0 ने समस्त जनपदों को संविधान दिवस मनाने हेतु आवश्यक दिशा-निर्देश पहले ही जारी कर दिये गये थे। संविधान दिवस के उपलक्ष्य पर समस्त अमृत सरोवर स्थलों पर आज यानि 26 नवंबर 2025 को सुबह से ही जनभागीदारी कराते हुए सामूहिक रूप से संविधान की प्रस्तावना का वाचन कराया गया। इसमें प्रदेश भर में गांवों में अमृत सरोवर उपयोगकर्ता समूह, सरकारी अधिकारी/कर्मचारी एवं स्थानीय समुदाय के हजारों लोग शामिल शामिल हुए और कार्यक्रम को सफल बनाया गया।
उपमुख्यमंत्री  केशव प्रसाद मौर्य के कुशल निर्देशन एवं उनके द्वारा की गई अपील के क्रम में हजारों की संख्या में लोग कार्यक्रम में शामिल हुए और अमृत सरोवर स्थलों पर सामूहिक रूप से संविधान की उद्देशिका का सशपथ पाठन किया गया।
उल्लेखनीय है कि संविधान दिवस 26 नवंबर को मनाया जाता है। दरअसल, वर्ष 1949 में 26 नवंबर के दिन ही भारत की संविधान सभा ने औपचारिक रूप से भारत के संविधान को अपनाया था। इसी दिन को हम हर साल संविधान दिवस के रूप में मनाते हैं। इस दिन हम संवैधानिक मूल्यों के प्रति नागरिकों में सम्मान की भावना को बढ़ावा देने के लिए यह दिवस मनाते हैं।
आयुक्त, ग्राम्य विकस  जी0एस0 प्रियदर्शी द्वारा अवगत कराया गया कि प्रदेश भर में मनरेगा योजना के अंतर्गत निर्मित अमृत सरोवर स्थलों पर जनसहभागिता के साथ संविधान दिवस मनाया गया। उन्होंने बताया कि प्रदेश भर से आ रही तस्वीरों से समझा जा सकता है कि स्थानीय समुदायों के लोगों ने इस कार्यक्रम में अपनी सहभागिता सुनिश्चित की हैं, और देखकर सुखद अनुभूति हो रही है कि इसमें बच्चों और महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

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