बहुत समय पहले, एक घने जंगल में एक महान ज्ञानी ऋषि रहते थे। वर्षों की तपस्या और साधना से उन्होंने अद्भुत सिद्धियाँ प्राप्त कर ली थीं। लोग कहते थे कि वे भूत, भविष्य और वर्तमान—सब कुछ सटीक देख सकते हैं।
यह बात सुनकर दो युवकों के मन में शरारत जागी। उन्होंने सोचा कि किसी तरह ऋषि को गलत साबित किया जाए।
दोनों ने एक योजना बनाई—
उन्होंने एक ज़िंदा चिड़िया पकड़ ली और उसे अपनी मुट्ठी में छिपा लिया। विचार यह था कि वे ऋषि से पूछेंगे—
“बाबा, हमारी मुट्ठी में जो चिड़िया है… वह जिंदा है या मरी हुई?”
योजना बड़ी चालाकी से बनाई गई थी।
अगर ऋषि कहते— चिड़िया मरी हुई है,
तो वे उसे जिंदा दिखा देंगे।
और यदि ऋषि कहते— चिड़िया जिंदा है,
तो वे उसे दबाकर मार देंगे और ऋषि को गलत साबित कर देंगे।
युवक पूरी तैयारी के साथ ऋषि के सामने पहुँचे और वही प्रश्न पूछा।
ऋषि मुस्कुराए…
और बोले—
“बेटा, यह चिड़िया तुम्हारे हाथ में है।
यह जिंदा रहेगी या मरेगी…
यह तुम्हारी इच्छा पर निर्भर करता है।”
युवक निरुत्तर हो गए।
उनकी चालाकी उसी क्षण धरी रह गई।
*कहानी का सार*
हमारी जिंदगी भी उसी चिड़िया की तरह है।
भविष्य हमारे हाथ में है —
हम चाहे तो उसे मेहनत, सकारात्मक सोच और अनुशासन से ऊँचा उड़ा सकते हैं,
और चाहे तो नेगेटिविटी में खोकर उसे खुद ही खत्म कर सकते हैं।
लोग क्या बोलेंगे, कौन मज़ाक उड़ाएगा, कौन हतोत्साहित करेगा
यह सब शोर है।
अर्जुन की तरह अपने लक्ष्य पर ध्यान रखो।
अर्जुन को केवल “मछली की आँख” दिखती थी,
वैसे ही आपको भी केवल अपना लक्ष्य दिखना चाहिए।
मेहनत करते रहो,
ध्यान केंद्रित रखो,
और अपनी मछली — यानी अपना भविष्य —🔥
अपने हाथों से अपना भविष्य स्वर्णिम बनाओ !
——– राम कुमार दीक्षित पत्रकार !
