ऐसे रची गई जग प्रसिद्ध हनुमान चालीसा “

मान्यताओं के अनुसार, अकबर के शासन काल में तुलसीदास जी समाज को वैदिक संस्कृति से  जोड़ने में लगे थे  ! रामचरित मानस की रचना के बाद वह घर— घर में प्रसिद्ध हो गये  ! लोग कठिन वक़्त में उनकी शरण लेने लगे  ! परन्तु इसी दौरान उनके चमत्कारों की अफवाहें भी   फैलनी लगीं  !

जब यह बातें अकबर तक  पहुंची, तो उसने तुलसीदास जी को दरबार में बुलाकर चमत्कार दिखाने को कहा , तुलसीदास जी ने विनम्रता से कहा कि वह तो केवल राम के  भक्त हैं  ! कोई चमत्कार नहीं जानते  ! बादशाह को यह  अपमानजनक लगा और उसने तुलसीदास जी को कैद में बंद करने का आदेश दे दिया  !

फतेहपुर सीकरी की जेल में  , चालीस दिनों के बंदी वास के दौरान तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा की रचना की  ! इसी बीच एक चमत्कारिक  घटना  घटी  ! अकबर के महल व फतेहपुर सीकरी में बंदरों ने अचानक उत्पात मचाना शुरू कर दिया और शहर को अस्त व्यस्त कर दिया   ! अकबर को लगा कि यह सब शायद तुलसीदास जी को कैद करने का परिणाम है  ! उनसे बंदरों का उत्पात रोकने की विनती की  ! तुलसीदास जी ने हनुमान जी की आराधना की और बन्दर गायब हो गए  ! अकबर ने उन्हें तत्काल रिहा कर दिया  !

कहा जाता है कि चालीसा के चालीस छन्द  , तुलसीदास जी के जेल के 40 दिनों के समान हैं  ! इन छंदों में उन्होंने  हनुमान जी की सामर्थ्य, करुणा, भय  निवारण शक्ति और भक्त—  रक्षा के गुणों की  अलौकिक वंदना की हैं   !

 

—— राम कुमार दीक्षित, पत्रकार   !

 

 

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