भारत में विज्ञान और नवाचार के सबसे बड़े उत्सव की शुरुआत को चिह्नित करते हुए सीएसआईआर-सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीडीआरआई), लखनऊ में आईआईएसएफ-2025 के कर्टन रेज़र कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में लखीमपुर खीरी जिले के तीन सरकारी विद्यालयों के 400 से अधिक छात्र-छात्राओं और 25 शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विज्ञान के प्रति जिज्ञासा एवं नवाचार की भावना का प्रत्यक्ष अनुभव किया।
दो दिवसीय कार्यक्रम (13-14 नवम्बर 2025) का उद्देश्य आगामी इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल (आईआईएसएफ)-2025 के प्रति जन-जागरूकता और उत्साह बढ़ाना है। इस वर्ष का महोत्सव 6 से 9 दिसम्बर 2025 तक पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ में आयोजित होगा। आईआईएसएफ देश का सबसे बड़ा वार्षिक विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार महोत्सव है, जिसका आयोजन पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा विभिन्न विज्ञान मंत्रालयों, विभागों और विज्ञान भारती के सहयोग से किया जा रहा है। इस वर्ष की थीम है “विज्ञान से समृद्धि: आत्मनिर्भर भारत के लिए।”
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने इंटरैक्टिव डेमो, विज्ञान क्विज़ और वैज्ञानिकों के साथ संवाद सत्रों में भाग लिया। डॉ. संजीव यादव, मुख्य वैज्ञानिक एवं जिज्ञासा और आउटरीच कार्यक्रम समन्वयक, ने छात्रों और शिक्षकों को आईआईएसएफ-2025 की विभिन्न गतिविधियों और अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने युवाओं को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में करियर बनाने हेतु प्रेरित किया।
सीडीआरआई के वैज्ञानिक डॉ. हिजास के. एम. और
नितिन तिवारी ने विद्यार्थियों को विभिन्न प्रयोगात्मक गतिविधियों में शामिल किया, जिससे उनमें विज्ञान के प्रति जिज्ञासा और आत्मविश्वास बढ़ा। इस अवसर पर श्री रविन्द्र लोंढे और उनकी टीम द्वारा निर्मित संस्थान की उपलब्धियों पर आधारित लघु फिल्मों का भी प्रदर्शन किया गया, जिनमें सीएसआईआर और उसकी प्रयोगशालाओं द्वारा राष्ट्रीय चुनौतियों के समाधान में किए गए योगदान को दर्शाया गया।
कार्यक्रम में इंटरैक्टिव सत्र, वैज्ञानिक प्रदर्शन और प्रस्तुतियां शामिल रहीं, जिन्होंने विद्यार्थियों को ज्ञान और रचनात्मकता के साथ विज्ञान की ओर अग्रसर होने के लिए प्रेरित किया। निदेशिका, सीएसआईआर-सीडीआरआई ने अपने वीडियो संदेश में विज्ञान आधारित नवाचार की राष्ट्र निर्माण में भूमिका पर बल दिया और विद्यार्थियों को वैज्ञानिक खोज एवं अधिगम में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का समापन उत्साहपूर्ण माहौल में हुआ, जहां विद्यार्थियों और शिक्षकों ने “विकसित भारत—आत्मनिर्भर भारत” के निर्माण में विज्ञान को प्रेरक शक्ति बनाने का संकल्प लिया।
