” हारा नहीं हूँ मैं “

अभी  कुछ  तो  शेष  है  मुझमें  ,

अभी  हारा     नहीं  हूँ      मैं   !

एक  दिन  चमकना  है  मुझको  भी  ,

भले  ही    तारा  नहीं  हूँ    मैं    !

मेरे  भीतर  भी  प्रवाह  रहता  है  ,

पर  जल  की  धारा   नहीं  हूँ  मैं    !

मैं  किस्मत   को  दोष  नहीं   देता  ,

क्यों कि किस्मत  का  मारा  नहीं  हूँ   मैं   !

मेरे  हृदय  में  भी  प्यार   पलता   है   ,

भले  ही  सूरत  का  प्यारा  नहीं  हूँ  मैं   !

सबके  सामने  खुश  ही  नज़र  आता  हूँ  मैं  ,

पर  खुश  भी  सारा   का   सारा  नहीं  हूँ   मैं   !

( संकलित  )

 

——–  राम कुमार दीक्षित  ,  पत्रकार   !

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