
भारत की सबसे बड़ी लड़ाई आज सीमाओं पर नहीं, मन और विचारों के भीतर लड़ी जा रही है।
बाहर से आता है कट्टरपंथ, भ्रम और वैचारिक आक्रमण। भीतर से फैलती है उदासीनता, जातीय विभाजन और अपनी ही संस्कृति को विस्मृति।
अब शत्रु तलवार लेकर नहीं आते – वे कहानी और विचार लेकर आते हैं। वे जानते हैं कि भारत को सीधा हराया नहीं जा सकता इसी लिए वे छद्म तरीकों से भारत के आत्मविश्वास को कमजोर करने का प्रयास करते है।
*यह युद्ध हथियारों का नहीं, चेतना का है।*
सनातन धर्म ने हमेशा सिखाया – संतुलन में ही शक्ति है, सह-अस्तित्व में ही विजय है।
*पर याद रहे :*
मौन सहिष्णुता नहीं है, और उदासीनता शांति नहीं है।
जब कोई सभ्यता अपने मूल्यों की रक्षा छोड़ देती है, तब अन्य लोग उसकी कहानी लिखते हैं।
धर्म की रक्षा किसी मत या आस्था की नहीं, बल्कि सत्य, न्याय और राष्ट्र की रक्षा है।
जब सनातन जागता है – तब भारत फिर उठ खड़ा होता है।
( संकलित )
— राम कुमार दीक्षित, पत्रकार !
