किनारे पर आ के देखा उस ढलते सूरज को
जो फैला रहा था क्षितिज पर
अपनी किरणों का एक जाल
उस पल को देखकर अनुभव हुआ
दौड़ती भागती जिंदगी में कुछ
सुकून के पल मिल जाएं तो
मन खुश हो जाए !
कभी ढलते सूरज को देखना
देगा तुम्हें कुछ संदेश
बताएगा धैर्य की एक परिभाषा
करवाएगा तुम्हें शीतलता भरे जीवन का एहसास
सिखलायेगा कोमल कोमल अनुभवों की कला को !
किनारे पर आ के देखा उस ढलते सूरज को !
( संकलित )
—– राम कुमार दीक्षित, पत्रकार !
