शुद्ध सात्विक कर्मों के बिना ईश्वर की अनुभूति संभव नहीं—स्वामी मुक्तानंद जी
हमीरपुर। सुमेरपुर कस्बे के उदय गार्डेन में चल रहे संत प्रवचन कार्यक्रम में स्वामी मुक्तानंद जी ने उपस्थित श्रद्धालुओं को कर्म की महत्ता का संदेश दिया। अपने प्रवचन में उन्होंने कहा कि जब तक जीव के कर्म शुद्ध और सात्विक नहीं होंगे, तब तक ईश्वर की वास्तविक अनुभूति संभव नहीं है। उन्होंने विस्तार से बताया कि स्वार्थ रहित कर्म ही अंतःकरण को निर्मल बनाते हैं और जीवन की दिशा बदलते हैं।
स्वामी जी ने कहा कि आज के दौर में अधिकांश लोग ‘मैं’ और ‘मेरा’ के छोटे दायरे में सिमटे हुए हैं। उनके अनुसार, हर इंसान मेहनत तो करता है, लेकिन अक्सर उसके पीछे निजी स्वार्थ छुपा रहता है, जिससे मन में पवित्रता का भाव नहीं आ पाता। आध्यात्मिकता की सच्ची प्राप्ति तभी संभव है, जब हमारी सोच और कर्म दोनों में शुद्धता हो। उन्होंने श्रोताओं से आह्वान किया कि जिस काल और परिस्थिति में हम हों, उसी में परमात्मा का भजन, चिंतन तथा सेवा करें—यही जीवन का उद्देश्य है।कार्यक्रम में स्वामी सर्व चैतन्य वृंदावन ने भाव-भक्ति से ओतप्रोत भजन प्रस्तुत किए, जिससे वातावरण भक्तिरस में सराबोर हो उठा। आयोजक राजेश सिंह ने अंत में सभी का आभार व्यक्त करते हुए बताया कि नर्मदा बचाओ आंदोलन के सूत्रधार महान संत स्वामी रोटीराम जी के प्रिय शिष्य स्वामी गिरिशानंद जी का आगमन शुक्रवार को उदय गार्डन में हो रहा है।
